फ्यूचर ऑफ मेडिकल साइंस
आने वाला कल आज से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाला है। जो चीज़ विदेशों में आज आती है हमारे देश में आने में पच्चास साल लग जाते हैं। छोटे शहरों में तो सदियां गुज़र जाती है विकास की राह तकते तकते। जहाँ बाक़ी देश एआई पे ध्यान दे रहे हैं नई नई तकनीक ईजाद कर रहे हैं। हम मंदिर मस्जिद अल्लाह भगवान पे ही अटके पड़े हैं। देश में जहाँ विज्ञान को आगे होना चाहिए था वहाँ बाबाओं को आगे किया जा रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता में इतने पुरातात्विक अवशेष नही निकले होंगे जितने 2014 के बाद इस देश में बाबा निकल आए। देश की रफ़्तार अचानक से चलते चलते रुक गई। जहाँ विज्ञान,ज्ञान,और तकनीक पे बात होनी चाहिए थी वहां हम पर्ची से भविष्य देख रहे और बाबाओं से बवासीर कब ठीक होगा, हमारे हसबैंड की तोंद कैसे कम होगी उसपे सवाल कर रहे हैं। बाबाओं की एक खेप निकल के आगयी। ज्ञान का सागर रुक सा गया अंधविश्वास बढ़ता ही जा रहा है। मौलवी मौलाना, पंडित, बाबा ,मंदिर मस्जिद, दुआ, नमाज़, हनुमान चालीसा में ये देश उलझ के रह गया। दुनिया स्पेस पे जाने की तैयारी कर रही है हम किस ईमारत के नीचे मंदिर था ये ढूंढ़ने में समय बर्बाद कर रहे हैं। जो देश...