अब्राहा के लश्कर से काबे को बचाने वाला और ईरान को अमेरिका से बचाने वाला ख़ुदा एक ही है।
जब एक बार हमने अल्लाह के आगे सजदा कर दिया तो उसके बाद किसी सुपर पॉवर को नही मानते। शहीद अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई। ये एक जुमला नही वो अक़ीदा है जिसकी बिना पर ईरान अमेरिका जैसे सो कॉल्ड सुपर पॉवर से लड़ गया। बेशक़ ख़ुदा पे यक़ीन हो तो वो अबाबील के ज़रिए यमन के बादशाह अब्राहा के लश्कर को भी किंकड़ी से तबाह कर सकता है। वो अब्राहा जिसे मिस्र,रोमन साम्रज्य डरते थे, यमन के खूंखार लश्कर, जो हाथीयों पे सवार होकर आते थे और सब कुछ तबाह करके चले जाते थे। जब वो मक्का में दाख़िल हुवे पूरे मक्का को डराने की कोशिश की। जनाबे अब्दुल मुताल्लिक़ जो हुज़ूर स.अ के दादा हैं, उनके ऊँटों को क़ब्ज़ा कर लिया और उनके ग़ुलाम से कहा जाओ इस क़बीले के सैय्यद (सरदार) को बुला लाओ और उनसे कहो यमन के बादशाह अब्राहा का पैग़ाम है कि वो मक्का को ख़ाली कर दें,इसे हमारे हवाले कर दे, जाओ बात चीत के लिए इस क़बीले के सरदार को बुलाओ। ग़ुलाम ने आकर बताया। जनाबे अब्दुल मुताल्लिक़ र.अ गए उन्होंने कहा मेरे ऊँटों को जो क़ब्ज़े मे लिया है उसे वापस कर दो। अब्राहा ने कहा हम आपके मुल्क़ पे हमला करने आए हैं,और आपको अपने ऊँट की पड़ी है, क्या ...