परवरिश ओ ज़बान मुसीबत का सामान
मैं बहुत परेशान हूँ । रिज़्क़ तंग होगया है । घर से ख़ैर ओ बरक़त ख़त्म होगयी। ना जाने क्यों ऐसा हुआ ? हम तो बहुत नमाज़ दुआ करते थे फिर ऐसा क्यों ? कौन सा ऐसा ग़ुनाह होगया ? और इसी सब मे इंसान अवसादग्रस्त होने लगता है उसका अपनी क़ाबिलियत और हुनर पर से यक़ीन उठने लगता है उसे लगता है वो कुछ नही कर सकता और धीरे धीरे वो अंदर से टूटने लगता है। पर कभी सोचा है मुसीबत आने की वजह क्या है ? क्यों रिज़्क़ तंग हुआ ? क्यों घर से बरक़त ख़त्म होगयी ? उसकी वजह आपकी औरतें आपकी बेटियाँ आपकी औलाद है। जब घर के अंदर ख़ुदा से ज़्यादा दूसरों का तज़किरा होगा तो क्या होगा। दुसरो की ग़ीबत, चुगली, होगी एक दूसरे से हसद रखा जाएगा। नंद, जेठानी, देवरानी, भाभी, सास सभी से ताल्लुक़ात तल्ख़ कर लिए जाएंगे। जिन बेटे बेटियों के सामने उनके मुस्तक़बिल और इंसानियत की बात करनी चाहिए वहाँ आप गड़े मुर्दे निकाल कर अपने रिश्तेदारों के ऐबों को बताते हैं। जिसको ये भी नही पता आपके साथ क्या हुआ था उसे भी आप बताते है फलाँ शख़्स ने ऐसा किया था अपने बेटे बेटियों के दिमाग़ में हसद और जलन का ख़...