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Showing posts from April, 2026

अब्राहा के लश्कर से काबे को बचाने वाला और ईरान को अमेरिका से बचाने वाला ख़ुदा एक ही है।

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जब एक बार हमने अल्लाह के आगे सजदा कर दिया तो उसके बाद किसी सुपर पॉवर को नही मानते। शहीद अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई। ये एक जुमला नही वो अक़ीदा है जिसकी बिना पर ईरान अमेरिका जैसे सो कॉल्ड सुपर पॉवर से लड़ गया। बेशक़ ख़ुदा पे यक़ीन हो तो वो अबाबील के ज़रिए यमन के बादशाह अब्राहा के लश्कर को भी किंकड़ी से तबाह कर सकता है। वो अब्राहा जिसे मिस्र,रोमन साम्रज्य डरते थे, यमन के खूंखार लश्कर, जो हाथीयों  पे सवार होकर आते थे और सब कुछ तबाह करके चले जाते थे। जब वो मक्का में दाख़िल हुवे पूरे मक्का को डराने की कोशिश की। जनाबे अब्दुल मुताल्लिक़ जो हुज़ूर स.अ के दादा हैं, उनके ऊँटों को क़ब्ज़ा कर लिया और उनके ग़ुलाम से कहा जाओ इस क़बीले के सैय्यद (सरदार) को बुला लाओ और उनसे कहो यमन के बादशाह अब्राहा का पैग़ाम है कि वो मक्का को ख़ाली कर दें,इसे हमारे हवाले कर दे, जाओ बात चीत के लिए इस क़बीले के सरदार को बुलाओ। ग़ुलाम ने आकर बताया। जनाबे अब्दुल मुताल्लिक़ र.अ गए उन्होंने कहा मेरे ऊँटों को जो क़ब्ज़े मे लिया है उसे वापस कर दो। अब्राहा ने कहा हम आपके मुल्क़ पे हमला करने आए हैं,और आपको अपने ऊँट की पड़ी है, क्या ...

हम (ईरान) दुश्मन को घुटनों पर ले आएंगे।। शहीद अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई

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हम दुश्मन को घुटनों पे ले आएंगे। शहीद अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई। चालीस दिन बाद, फ़तह ख़ैबर के बाद एक बार फिर हैदर ए कर्रार के मानने वालों ने इस ख़ैबर को भी फतह कर ही लिया और दर ए ख़ैबर की तरह इस दर (साम्रज्यवाद) को उखाड़ फेंका। ग़ैबी इम्दाद उन्ही को हासिल है जो ग़ैब पे ईमान रखते हैं। आज दुश्मन घुटनों पे आगया, एक बार फिर अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई का कहना सच होगया।  उन्होंने कहा था, हम दुश्मन को घुटनों पे ले आएंगे, हमसे (ईरान) जंग में दुश्मन ज़लील ओ रुस्वा होगा इंशाअल्लाह। वो अपने हथियार परभरोसा रखते हैं और हम अपने ख़ुदा पर। आप अपनी आँखों से उन्हें ज़लील होता हुआ देखेंगे। एक बार फिर से इस्लाम ख़ुद को दोहरा रहा है। ईमाम हसन ए मुज्तबा की सुलह, और अब अयातुल्लाह अली मुज्तबा की सुलह। ऐसा लग रहा है आधुनिक युग की कर्बला हमारे सामने हो रही हो। वही हालात, वही जज़्बात, वही शहादत का जज़्बा और फिर फ़तह। ईमाम हुसैन अस. की शहादत के बाद दुनिया ने ईमाम हुसैन इब्ने अली अस. को पहचाना था, यहाँ भी अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई र.अ की शहादत के बाद दुनिया ने उन्हें पहचाना।  यज़ीद ने भी सोचा था ई...