क्या हम अपनी बेटी/बेटे का घर उजाड़ रहे हैं ?

 बहोत तेज़ प्यास लगी है चलो कही चलते है कुछ खाते पीते हैं ।
गरीब और प्यास से बेहाल एक जोड़े ने सामने देखा एक व्यक्ति नारियल पानी बेच रहा है , चलो यार नारियल पानी पीते हैं उनके जेब में सिर्फ एक व्यक्ति के ही खाने का पैसा था लड़के ने सोचा क्यों ना बड़ा वाला नारियल ले जिसमे पानी के साथ साथ  नारियल का फल भी मिल जाये उन्होंने छांट कर एक बड़ा सा नारियल लिया सोचा इसमे से नारियल का फल भी निकलेगा पानी पिया उसका स्वाद थोड़ा कसैला लगा पर सोचा अंदर गोला होगा वो मीठा होगा जब पानी पी लिया और दुकानदार से कहा भइया हमे इसका फल निकाल कर दे दीजिए दुकानदार ने जैसे ही नारियल को फाड़ा उसमे से सफेद मीठे फल की जगह सड़ा हुवा फल निकला वो निराश और हताश होगये अब ना उनके पास पैसा था कि वो अपनी भूख मिटाते ना दुकानदार की इसमे कोई गलती थी चूँकि उस नारियल का चुनाव उन्होंने स्वयं किया था ।


यही हाल हमारे समाज का भी है हम अपनी बेटी की शादी करने जाते है तो पहले देखते है घर कितना बड़ा है, लड़के की कमाई कितनी है बड़ा घर बड़ी गाड़ी बड़े रुतबे और पैसे के चक्कर में हम ये भूल जाते है कि वो घर वो लोग कैसे हैं ।
आज सभी को डॉक्टर, इंजीनियर, CA आईएएस ऑफिसर  से शादी करनी होती है लड़कियाँ तो लड़कियाँ उनके परिवार के लोग भी बड़े ओहदे, रुतबे शान ओ शौकत के चक्कर में ये भूल जाते है कि एक सुखी और खुशहाल ज़िन्दगी के लिए जो चीज़ चाहिए क्या वो उस लड़के में हैं
सीरत हैं, मोहब्बत है, प्यार है, इंसानियत, है, अपनापन है, ।
नही हमे तो बस खूबसूरत लड़का चाहिए ख़ूबसीरत नही ऊपर से हम उनके खुलूस प्यार शान और शौकत भरे रुतबे को देख कर अपनी बेटी दे देते है बाद में क्या होता हैं उस घर में बेटी की शिकायतें बढ़ जाती हैं बेटा बाप से बीवी शौहर से, शौहर ससुराल से और ससुराल वाले सारे जहाँ से एक दूसरे की बस शिकायत करते है लड़की ऐसी है लड़की वैसी है दरअसल गलती हमारी है हम ऊपर से लोगो को देखते है अंदर से वो कैसे है ये कभी नही देखते हैं 

उसी तरह लड़के भी पैसे वाली  और खूबसूरत लड़की तलाश करते है दहेज़ का सदक़ा कसरत से मांगेंगे क्योंकि उनकी औक़ात सदक़ा ही खाने की होती है याद रखो जिस अल्लाह ने शादी के लिए जोड़ी बनाई है उसने रिज़्क़ के लिए रोज़ी भी मुक़र्रर की है आप दहेज़ की रकम के दम पर साल दो साल 4 साल खा  सकते हैं हैं ज़िन्दगी भर नही लड़की नेक और सीरतदार बा-हया तलाश करें बेहया नही ख़ूबसीरत होगी तो आपके घर परिवार माशारे को खूबसूरत बनायेगी खूबसूरत होगी तो आपके अपनो को नीचा दिखायेगी शहज़ादी फ़ातिमा ज़हरा s.a के बाबा हज़रत रसूल ए खुदा saww के कदमो में पूरी क़ायनात थी पर फिर भी उन्हीने अपनी बेटी की शादी बिना दहेज़ के सादगी से की बस इसलिए कि उन्हें पता था कि गरीबी की वजह से शादियां नही होपायेगी आप ने शहज़ादी फ़ातिमा ज़हरा s.a की शादी सादगी से करके ये बता दिया कि कल को हर ग़रीब बाप फ़क्र से कह सके मेरे नबी ने जिनके कदमों में दुनिया की सारी दौलत थी फिर भी सादगी से शादी की ये सुन्नत है हमे इसपर अमल करना चाहिए पर हमारी जेहालत ने हमे इल्म और क़ुरान, हदीस से इतना दूर कर दिया है कि हम नफ़्स के कदमो तले दबे हुवे है   हम दुनिया की चका चौंध में इतने अंधे हो चुकी हैं कि हमे सही गलत का फ़र्क़ ही नही पता और हम अपने आपको मुसलमान कहते है क्या ख़ाक़ हम मुसलमान है जो अपने नबी की सुन्नत पर ही अमल ना करे और किसी ग़रीब माँ बाप पर दहेज़ का बोझ डाल दे 
मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया अपने लिए बीवी तलाश करने से पहले अपने होने वाले बच्चों के लिए एक माँ तलाश करो जिस घर में तालीम रफ्ता बीवी होगी वो घर एक मदरसे से बेहतर हैं ।
पर हमें तो बस खूबसूरत ,कमसीन लड़की चाहिए ख़ूबसीरत नही ।
 इमाम जाफ़र अल सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं जो ये सोच कर शादी नही करता कि मेरे पास रिज़्क़ का जरिया नही है वो यक़ीनन अल्लाह पर शक़ करता हैं
मेरे भाइयों मेरी बहेनो रिश्ता डॉक्टर, इंजीनियर, ऑफीसर हो या ना हो लड़की चाहे ख़ूबसूरत पैसे वाली हो या ना हो शादी के पहले बस इतना देखना 
उसमे इंसानियत है, उसका शजरा सही है वो नमाज़ी है वो क़ुरान हदीस और सीरत ए मासूमीन अलैहिस्सलाम पर चलने वाला है या नही, उसमे मोहब्बत है या नही , मेरी बहेनो बड़ा घर बड़ी गाड़ी ये रुतबा शान ओ शौकत सब बेकार है जब उस घर में आपको मोहब्बत ना मिले आपको प्यार ना मिले रिश्ता ख़ूबसीरत देख कर करो हसब ओ नसब देख कर करो ना कि खूबसूरत और पैसा ।
मेरे भाइयों लड़की ख़ूबसूरत ना हो पर ख़ूबसीरत हो नेक हो  बा हया हो बेहया ना हो और कोशिश करना आप किसी माँ बाप के बेटे बने सदके वाले (दहेज़) वाले दामाद नही अल्लाह की ज़ात पर भरोसा रखो वो रंक को राजा भी बनाता है बस अपने खुदा पर इस तरह यक़ीन रखो जैसे अपनी मौत पर रखते हो आइये हम सब मिलकर इस्लामी रिश्ता कायम कर जिसका हमे क़ुरान और रसूल saww ने दिया है ना कि शैतानी रिश्ता जो हमे दुनिया ने दिया है । 

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