सैय्यद, शेख़, पठान, अंसारी, अलक़ाब जो सामाजिक कार्यों की पहचान बन गया एच आर नेविल द्वारा संकलित जौनपुर गैज़ेट 1908 के कुछ अंश।
इस्लाम ने हमे मुसलमान बनाया और लोगों ने जातियों में बांट दिया कोई सैय्यद होगया, कोई शेख, कोई पठान, कोई अंसारी, अब इन्ही से कई सारी उपजातियों ने भी क़दम रख दिया। शजरा, (Family Tree) वंशावली एक ऐसा पेड़ है जो बताता है आपकी जड़ कहाँ है। भारत में जो लोग आएं, कहाँ से कैसे आएं ? लोग सैय्यद शेख पठान अंसारी हुवे कैसे हुवे ? मान ले हम सैय्यद है मेरे दो बेटे और और दो बेटी है बेटों की शादी सैय्यद में होगयी बेटी की भी शादी सैय्यद में फिर उनसे जो बच्चे के बच्चे हुवे वो कहाँ है उनकी वंशवाली क्या है किस हाल में है किसका शजरा कहाँ मिलता है, अब इसी मिशन को पूरा करना है, अगर आप सभी का सहयोग मिले तो इसकी जड़ तक जाकर एक डिजिटल पैराग्राफ सभी के शजरे का बनाना है जहाँ से सभी का शजरा एक क्लिक पर मिल जाए उनकी जड़ों के साथ यानी पुरानी पीढ़ी से वर्तमान पीढ़ी तक, इससे ये होगा जो आपकी ज़मीन जायदाद कहीं होगी उसे भी आपको ढूंढने में मदद मिलेगी। इसी कड़ी में आज जौनपुर के गैज़ेट का एक भाग पोस्ट कर रहे हैं, अब इसमें आप अपना अपना शजरा जोड़ते जाइये और अगर आपके पास पुराना शजरा हो जौनपुर का उसे भी बताइए एच. आर....