Posts

Showing posts from July, 2026

परवरिश ओ ज़बान मुसीबत का सामान

Image
मैं बहुत परेशान हूँ ।  रिज़्क़ तंग होगया है ।  घर से ख़ैर ओ बरक़त ख़त्म होगयी।  ना जाने क्यों ऐसा हुआ ? हम तो बहुत नमाज़ दुआ करते थे फिर ऐसा क्यों ?  कौन सा ऐसा ग़ुनाह होगया ? और इसी सब मे इंसान अवसादग्रस्त होने लगता है उसका अपनी क़ाबिलियत और हुनर पर से यक़ीन उठने लगता है उसे लगता है वो कुछ नही कर सकता और धीरे धीरे वो अंदर से टूटने लगता है।  पर कभी सोचा है मुसीबत आने की वजह क्या है ?  क्यों रिज़्क़ तंग हुआ ?  क्यों घर से बरक़त ख़त्म होगयी ?  उसकी वजह आपकी औरतें आपकी बेटियाँ आपकी औलाद  है। जब घर के अंदर ख़ुदा से ज़्यादा दूसरों का तज़किरा होगा तो क्या होगा। दुसरो की ग़ीबत, चुगली, होगी एक दूसरे से हसद रखा जाएगा।  नंद, जेठानी, देवरानी, भाभी, सास सभी से ताल्लुक़ात तल्ख़ कर लिए जाएंगे। जिन बेटे बेटियों के सामने उनके मुस्तक़बिल और इंसानियत की बात करनी चाहिए वहाँ आप गड़े मुर्दे निकाल कर अपने रिश्तेदारों के ऐबों को बताते हैं। जिसको ये भी नही पता आपके साथ क्या हुआ था उसे भी आप बताते है फलाँ शख़्स ने ऐसा किया था अपने बेटे बेटियों के दिमाग़ में हसद और जलन का ख़...

अदब ओ तहज़ीब के दायरे में शायरी होनी चाहिए। अहलेबैत अस. तू तड़ाक नही करते।

Image
शायरों और ज़ाकिरों कि है ये तू तड़ाक की भाषा है ।   रसूलअल्लाह स.अ से लेकर आले रसूल स.अ के नामों में अदब ओ तहज़ीब को बिल्कुल ख़त्म करके अपने रदीफ़ ओ क़ाफ़िया के लिए  बहर के अंदर शेर कहने के लिए और ज़ाकिरों को आसानी के लिए ईजाद किया गया है तू तड़ाक।  चाहे किसी अम्बिया अस. से ख़ुदा मुख़ातिब हो या रसूल आले रसूल किसी से क़लाम कर रहे हो उसमे शायरों ज़ाकिरों,ख़ातिबों ने और अनुवादक ने तू तड़ाक से ही मुख़ातिब किया।  भला जिसके इल्म का मयार इतना बुलन्द हो वो अपने से बड़े को तू कहेगा ?  हर्गिज़ नही, ये शायरों और ज़ाकिरों कि ज़बान हो सकती है अम्बिया, ख़ुदा, रसूल (स) और आले रसूल अस. की बिल्कुल नही। शहज़ादी सकीना अपने बाबा से तुम कहेंगी ? हज़रत ईमाम हुसैन अस. अपने बच्चे को तू कहेंगे ? हर्गिज़ नही जिसके घर की इल्म मीरास हो उस घर के बच्चे अपने से बड़े को तू तड़ाक हर्गिज़ नही करेंगे अदब ओ तहज़ीब का एक मयार था जो धीरे धीरे शायरों ने ख़त्म कर दिया। क्या हो जाएगा अगर आप लोग "तू" तुम" की जगह आप लफ़्ज़ को इस्तेमाल कर लेंगे ? आज कल के नौहाख्वां और ख़तीब भी बारीक़ी पर बिल्कुल ग़ौर नही करते हैं कि किसके नाम ...