दरगाहों में धागे फिर भी क़िस्मत के आभाग्ये

दरगाहों में धागे फिर भी क़िस्मत के आभाग्ये।

पास होना है छिल्ला बांध दो शादी करनी है छिल्ला बांध दो नौकरी पानी है छिल्ला बांध दो  घर बनवाना है छिल्ला बांध दो दुनिया का कोई काम करना है सीधा सा फंडा है दरगाह में जाकर छिल्ला बांध दो दिल ईमान से ख़ाली हो फिर भी बंदा अल्लाह से सवाली हो । मौलवी मौलाना ने जितना अब क़ौम को अपाहिज बना दिया पहले कभी नही थी । कभी आपने किसी मौलवी मौलाना को किसी दरगाह में छिल्ला बांधते ज़ियारत करते देखा ? नही ना । देखेंगे भी नही क्योंकि उनका काम है आपको बस बेवकूफ़ बनाना और आप बनते भी है ये अल्लाह के अज़ाब से कम छिल्ला ना बांधने नज़र ना दिलाने से ज़्यादा डराते है । इनके अक़ीदे के मुताबिक़ आप मेहनत ना करें आप छिल्ला बांध दे रातों रात करोड़पति बन जाएंगे । आप पढ़ाई ना करें छिल्ला बांध दे टॉपर बन जाएंगे । आपकी सीरत ओ कीरत अच्छी ना हो शराबी जुआरी हो छिल्ला बाँध दे आपको नेक लड़की मिल जाएगी । अल्लाह और अहलेबैत अलैहिस्सलाम की सीरतों पर अमल करने की जगह ये हमे शैतान का पैरोकार ज़्यादा बनाते हैं । इन्हें भी पता है आपको क्या बताना है । और तो और ये कर्बला की जंग को इस तरह पेश करेंगे जैसे लगेगा इमाम हुसैन अ.स. मौला अब्बास, ईमाम ज़ैनुलआब्दीन बहुत कमज़ोर थे । हाए रे मेरा मज़लूम ईमाम .. अरे कमबख्तों वो ईमाम थे नूरानी शख्सियत थे वो अगर एक पल को भी सिर्फ़ ईमाम होने का तसव्वुर भी कर लेते तो दुनिया उलट के रख देते पर उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल पेश की इंसानियत की मिसाल वरना ये जो एक दूसरे के दुख दर्द को महसूस करते हो ये नही कर पाते ये जो अपनों के खोने पर ग़मगीन होकर सब्र करते हो ये नही कर पाते । कर्बला की जंग इंसानियत की बक़ा के लिए थी एक तरफ़ क़ुव्वते रब्बानी थी दूसरी तरफ फौजे शैतानी पर वहाँ ईमाम हुसैन ने इंसानियत के अख्तियार से जंग की एक इन्सान की शक़्ल में ये मौलवी मौलाना कभी नही बताएंगे। ख़ुद फ्लाइट से आएंगे अच्छे अच्छे होटलों में रुकेंगे मुर्ग मुसलम खाएंगे गाड़ियों से आये जाएंगे मजलिसों मे बैठ के अपने सफ़र की दास्तान को बड़े फ़क्र से बतायेंगे अपने बैरूनी सफ़र का तज़किरा करेंगे वहाँ बैठे ग़रीब को तो यही लगेगा अल्लाह ने हमे ग़रीब बनाया मौलाना साहब ही ठीक है वो दर्स की बजाए दर्द लेकर घर आता है अल्लाह से शिक़वा ओ शिक़ायत करने लगता है मायूस होजाता है । हज़ारो लाखों रुपए लेकर हमे सालों से बस एक तरह की रवायत बताने वाले मौलवी मौलाना ने कभी मजलिसों जलसों से ये कहा कि हम अपने ज़ाती रिज़्क़ से किसी एक बच्चे की पढ़ाई लिखाई का ख़र्च उठाते है ?  कभी ये कहा हम अल्लाह के दिए हुवे रिज़्क़ मे से किसी को कारोबार कटवाते हैं ? किसी मौलाना ने ये कहा कि हम किसी बच्ची की शादी कटवाते हैं ईलाज करवाते हैं ? नही ना । ये बस आपको बेवकूफ़ बनाते है और आपको कमज़ोर बनाते हैं । पैसा फ़ितना और फ़साद की जड़ हौ क़ुरआन कहता है । क़ुरआन कहता है हम तुम्हे दौलत और औलाद से अज़मायेंगे । क़ुरआन कहता है जो लोग दुनिया में गुनाह करके भी ख़ुशहाल है वो ना सोचे कि अल्लाह ने उन्हें ढील दी दी है बल्कि उनके गले में फंदा डाल दिया गया है और अल्लाह जब चाहेगा उस फंदे को कस देगा । ये सब कभी कोई मौलवी मौलाना नही बतायेगा । इल्म की तरफ़ रुजू करने को कोई नही कहेगा मस्जिद इमामबाड़ा बनाने के नाम पर करोड़ो ख़र्च करने वाले स्कूल कॉलेज बनाने के नाम पर पीछे हट जाते हैं जो मौलवी मौलाना दीन की ज़्यादा बातें करते हैं कभी वक़्त पड़ने पर आज़मा लेना वो सबसे पहले पीछे हटेंगे । आपको अभी अगर पैसे की ज़रूरत पड़ जाए और आप अपने किसी परिचित मौलवी मौलाना से मांग ले वो कहेंगे इतना रिज़्क़ कहाँ है वही जब आपसे लेना हो तो कहेंगे मियाँ ये आपका अल्लाह की राह में पैसा ख़र्च होगा आप को इंशाअल्लाह अल्लाह इसका अज्र देगा और आपके रिज़्क़ में ख़ूब बरक़त देगा ।
50 हज़ार कमाने वाला भी एक लाख दान कर देता है । क्यों भाई जो अल्लाह उसके रिज़्क़ में बरक़त दे सकता है वो आपके रिज़्क़ मे बरक़त नही दे सकता । वक़्त रहते सम्भल जाइये अपने बच्चों को इल्म हासिल करवाइये और ख़ुद भी इल्म हासिल करें । मैं ये नही कहता सभी मौलवी मौलाना ग़लत है कुछ अच्छे है कुछ बुरे पर बुरे ज़्यादा है अच्छे कम । दुनिया को दीं ईमान की बातें बताते है ख़ुद उसपर अमल नही करते । मस्जिद इमामबाड़ों को दान देने की जगह क़ौम के बच्चों की तालीम के लिए पैसा दीजिये मदरसों, स्कूल कॉलेज को तामीर करवाइये । जब दिल ईमान से ख़ाली रहेगा तो मस्जिद इमामबाड़ा बना कर क्या करेंगे । इल्म आपके बच्चों को नही आपकी नस्लों की हिफाज़त करेगा इल्म हासिल करें क़ाबिल बने । दीन ए इस्लाम को जाने समझे क़ुरआन और अहलेबैत का दामन थामे ना कि मौलवी मौलाना का । जहाँ ज़रूरत हो वहाँ किसी क़ौम के दीनी आलिम से राब्ता करें और अपने मसलेहत का हल करें ।

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