ओह मय गॉड इसने तो अक़ीदा जिहाद कर डाला अब क्या होगा

लव जिहाद पर कानून बन गया क्योंकि इससे धर्मांतरण होता है । पर अक़ीदे जिहाद पर कानून बनाने के लिए ना सरकार ने कभी सोचा ना ही धार्मिक नेताओं ने । धर्म परिवर्तन से भी बड़ा मसला आस्था परिवर्तन का है उसपर कोई विचार नही करता । इस्लाम धर्म को मानने वाले मुस्लिम समुदाय में ही देख ले धर्म इस्लाम है समुदाय मुस्लिम है पर अक़ीदे जिहाद के चक्कर में खूंरेज़ी होजाती है । एक ही धर्म से भी होते हुवे शिया-सुन्नी अलग है क़ुरआन एक नबी एक अल्लाह एक बस अक़ीदा (आस्था) अलग होने से कई टुकड़ो में बंटे हुवे हैं । शिया सुन्नी में नही जा सकता सुन्नी अहले हदीस में नही जा सकता अहले हदीस देवबंदी को नही मानता देवबंदी बरेलवियों से नफ़रत करते है बरेलवी हनफ़ी को बुरा कहते है हनफ़ी चिश्तियों को बुरा कहते हैं उसमें भी सैय्यद में पठान को नही मिला सकते पठान अंसारियों को पसंद नही करते । सैय्यद, शेख़, पठान, अंसारी, मिर्ज़ा सिद्दीक़ी, क़ुरैशी, आलाने फलाने मतलब ये है कि सैय्यद को सैय्यद ही चाहिए हनफ़ी को हनफ़ी बरेलवी को बरेलवी देवबंदी को देवबंदी शिया को शिया ही । मजाल है कोई दूसरे अक़ीदे की लड़की से शादी करले । शिया सुन्नी मुसलमानों के दो गिरोह आज है तो उसकी वजह बस अक़ीदा है वरना अल्लाह रसूल क़ुरआन नमाज़ जन्नत जहन्नुम नेकी गुनाह ख़ुम्स, ज़कात, हज रोज़ा सब एक है बस तरीक़ा जिसे हमारी ज़बान में अक़ीदा कहते है उसकी लड़ाई है । उसी तरह हिन्दू धर्म में हिन्दू होते हुवे भी मौर्या की आस्था अलग है दलित की आस्था अलग है । क्षत्रिय, ब्राह्मण, कुमी,लोहार, सोनार,कायस्थ, भूमिहार, अहिर । सबका अपना सब ग्रुप है क्षत्रिय में कोई ठाकुर कोई कुँवर कोई रघुवंशी कोई सोलंकी कोई सिंह कहलाता है ब्राह्मण में भी पण्डित, मिश्रा, दुबे,शर्मा, चतुर्वेदी, द्विवेदी, त्रिवेदी इत्यादि है । मतलब हर किसी का धर्म एक भगवान एक ग्रंथ एक है पर अक़ीदे (आस्था) की लड़ाई है ठाकुर-पंडित केयहाँ शादी नही करता पंडित तेली के यहाँ शादी नही करता । हर धर्म में अक़ीदे की लड़ाई है । दलित ही एक ऐसे है जिनका कोई मूलधर्म नही जिस तरह मौसम बदल जाते है वैसा इनका धर्म बदल जाता है । धार्मिक आस्था से ज़्यादा अगर इनके सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ता है इनका धर्म परिवर्तन होजाता है । ये विपक्ष के वो विधायक होते है जो कभी भी पाला बदल कर सत्ताधारी दल का दामन थाम सकते हैं । मुस्लिम में फ़ायदा दिखा मुस्लिम बन गए ईसाई में फ़ायदा दिखा ईसाई बन गए सिख में फ़ायदा दिखा सिख बन गये फिर हिन्दू कार्यकर्ता इन्हें इनके मूलधर्म में वापस ले आते हैं । अक़्सर यही होता है ये ईसाई मशीनरी में शामिल होजाते है फिर हिन्दू धर्म में इनकी वापसी होती है । कभी ईसाई कभी मुस्लिम तो कभी सिख । पूछने पर पता चलता है साहब दुआ नही पूरी होरही थी तो धर्म बदल लिया । धर्म की तो कही से लड़ाई ही नही है असली जिहाद तो अक़ीदे का चल रहा है जिसपर किसी का ध्यान नही है । किसी भी धर्म के व्यक्ति को आप ज़बरदस्ती दूसरे धर्म को मनवा सकते है पर वो दिल से कभी स्वीकार नही करेगा ना वो सत्य उसके धर्म परिवर्तन से बदल जायेगा जो सत्य है जब तक वो सारे धार्मिक अनुष्ठान कर्मकांड को दिल से स्वीकार ना करले उसमे अपनी आस्था ना रख ले । धर्म परिवर्तन से कोई फ़र्क़ नही पड़ता जब तक अक़ीदे (आस्था) का परिवर्तन ना हो । जिहाद का मतलब ही है ख़ुद से लड़ना और सबसे बड़ा जिहाद नफ़्स का जिहाद है मतलब अपनी इच्छाओं पर क़ाबू रखना उससे लड़ना बुरी आदतों से बचना अच्छी आदतों के प्रचार प्रसार करना एक दूसरे से मोहब्बत करना उनकी मदद करना यही असल जिहाद है ।
सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है जिसे हम निभा नही रहे है दुनिया की ऐशोआराम की ज़िन्दगी और शोहरत के लिए रिश्ते कलंकित किये जा रहे है । हिन्दू मुस्लिम को आपस में बांटा जा रहा है ना हमारे खून अलग है ना हमारी धरती ना आसमान । जिस नदी का पानी हिन्दू पीता है उसी नदी का पानी मुस्लिम भी हमारा रहन सहन खाना पीना सब कुछ सामान्य है बस हमारे तरीक़े और अक़ीदे अलग है जिसने हमे कई हिस्सों में बांट दिया है । आप राजनीतिक से हट कर नेताओं की बातों पर ग़ौर ना करके अपने अगल बगल निकल के देखे दुनिया बहुत खूबसूरत है बस इस टीवी की दुनिया और राजनीति ने हमे एक दूसरे का दुश्मन बना दिया । 

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    1. कोशिश रहेगी कुछ अनकहे अनसुने पहलू पर लिखने की । इंशाअल्लाह

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