कोरोना से जीतने से पहले ही मस्तिष्क के "डर" से हम हार जायेंगे

चारों तरफ एक ख़ौफ़ का माहौल है , आज कोरोना के आगे सारी बीमारियों ने दम तोड़ दिया है ।
अब ना किसी के अंदर डेंगू दिखाई देता है ना मलेरिया टाइफाइड, दमा, न्यूमोनिया इंफेक्शन सब नदारद है , हर तरफ बस जिसे देखों यही कह रहा है कोरोना है ।
सामान्य सर्दी खाँसी ज़ुकाम बुखार वाला व्यक्ति भी ख़ुद को कोरोना का मरीज़ समझने लगा है   ।
हर तरफ से हलमीन नासरीन यनसुरना की सदा आने लगी है कोई किसी की मदद को आगे नही आरहा है ना किसी का पद प्रतिष्ठा काम आरहा है ना किसी का पैसा और सिफारिश , हमे लगने लगा है मौत हमारा मुक़द्दर है, अब बचना बहुत मुश्किल है ।
मीडिया ने अपना काम कर दिया उसे ख़ौफ़ पैदा करना था ख़ौफ़ पैदा कर दिया । हमारा दिमाग़ हमे संकेत दे चुका है हम कोरोना ग्रसित हैं अब हमें कोई नही बचा सकता है ।
अगर आप मनोचिकित्सक के नज़रिए से देखे सोचों तो आपको बहुत कुछ पता चलेगा । हमारे शरीर का सारा सिस्टम हमारे मस्तिष्क से ऑपरेट होता है हम जैसा सोचते हैं हमारा मस्तिष्क जिस्म को वही संदेश पहुँचा देता है । 
अगर हमने सोच लिया हम बीमार है तो ये नकारात्मक सोच हमारे शरीर की ऊर्जा को चूस लेती है शरीर का एक्टिव सिस्टम धीरे धीरे ये मान लेता है कि मालिक की तबीयत ख़राब है क्योंकि सब कुछ दिमाग़ के ऊपर निर्भर है दिमाग़ ने अगर जो सोचा हमारा शरीर वैसा ही बर्ताव करना शुरू कर देता है । 
आप अगर न्यूज़ देख रहे हैं सोशल मीडिया पर एक्टिव है या लोगो से मिल रहे हैं तो आप देखेंगे सौ में से नब्बे व्यक्ति केवल कोरोना की बात कर रहा है , आपका मस्तिष्क ये मान लेता है कोरोना एक बीमारी है और वो लोगो के सम्पर्क में आने से मास्क ना लगाने से बाहर का खाने पीने से या किसी के छूने से होजाता है । आप अगर बाहर जाते हैं तो आपका मस्तिष्क ना चाहते हुवे भी आपके शरीर को ये संदेश देता  है कि फलां शख़्स बीमार है तुम सम्पर्क मे आगए हो अब तुम्हे भी कोरोना होगा । और फिर यही सोच हमारे शरीर को बीमारी की तरफ ढकेल देती है हमे सारे लक्षण ख़ुद में दिखने लगते हैं और हम ख़ुद को बीमार मान कर दवा खाना शुरू कर देते हैं । ये हमारे दिमाग़ का डर है जो हमारे शरीर पर हावी हो चुका है एक अनजाना सा डर पैदा कर दिया है ।

मेंढक और साँप का एक बहुत दिलचस्प किस्सा है इसी मानसिक स्थिति को लेकर की कैसे हमारा मस्तिष्क हमारे मौत की वजह बनता है ।
एक बार साँप और मेंढक में शर्त लगी कि किसका ख़ौफ़ लोगों पर ज़्यादा है । सांप ने मेंढक से कहा तुम सामने उस व्यक्ति को देख रहे हो चलो दोनों वहाँ चलते हैं तुम उसे काट लो फिर वहाँ से हट जाओ । मेंढक ने वैसा ही किया उसने काटा और वहाँ से हट गया उसकी जगह पर साँप बैठ गया , का व्यक्ति ने जैसे ही साँप को देखा उसको लगा उसे सांप ने काट लिया है और अब उसका मरना निश्चित है ,कुछ ही देर बाद उसने हार्ट अटैक से दम तोड़ दिया ।
अब एक दूसरे व्यक्ति को सांप ने काटा और वहाँ से वो हट गया उसकी जगह मेंढक बैठ गया उस व्यक्ति ने जैसे ही देखा मुस्कुराया की एक मेंढक ने काटा है और वो आराम से चला गया । 
अब आप देखिए किस तरह दिमाग़ मे डर पैदा होता है और हमारी मौत होजाती है ।
मीडिया लाशों के ढेर लगाना चाहती है चारों तरफ इतना डर पैदा होगया है कि आधे स ज़्यादा मौत डर से होरही है और जो बच जायेंगे वो कोरोना के डर से आत्महत्या कर लेंगे । उसकी वजह ये है कि हमारे देश में सभी का आशियाना नही है और अगर है भी तो दो चार कमरों वाला मकान है हर कोई इतना सम्पन्न नही है कि अलग इसोलेशन और क़ुरनटाइन ख़ुद को करें । भारत की आधे से ज़्यादा आबादी ग़रीबी रेखा स नीचे निवास करती है जिनके पास खाने को नही है वो अलग रहने की व्यवस्था कहाँ से करेंगे अगर उनके पास कुछ है तो पारिवारिक सम्बन्ध और उसका महत्त्व । अब अगर किसी ग़रीब के मन मे ये डर बैठ गया की उसे कोरोना हुआ है तब ना वो ठीक से इलाज करवा पायेगा ना ख़ुद को अकेला रख पायेगा क्योंकि संसाधन उसके पास है नही और सरकार ने तो ग़रीबो को मरने के लिए छोड़ ही दिया है , इस परिस्थिति में जिस तरह से डर का  माहौल पैदा किया जा रहा है ग़रीब इंसान ख़ुद को बचाये या परिवार को इसी उधेड़बुन में घर से कट जायेगा दूर होजायेगा ये सोच के कही उसकी वजह से उसके परिवार को कोरोना ना होजाए और इसी डर के साए में तनावग्रस्त होकर या तो आत्महत्या कर लेगा या फिर पागल होजायेगा।कमज़ोर दिल वाले तो ऐसे ही इस ईद ख़ौफ़ से दिल का दौरा पड़ने से मर रहें हैं । 
आपसे बस इतना कहना चाहेंगे ख़ुद पर इस डर को हावी ना होने दे ना घर परिवार में कोरोना की बात करें । अगर आपको लक्षण लगे तो उसका ईलाज करवाए अपने शरीर पर नकारात्मकता को हावी ना होने दे मन और तन को सामान्य रखें , कोई भी बीमारी आपके हौसले से बड़ी नही होती हौसले के आगे सभी पस्त होजाते है फिर ये बीमारी क्या है । आप अपने और अपने परिवार का ख़्याल रखें पौष्टिक आहार लें व्ययाम करें मन को शांत रखें ख़ूब हंसे । ज़्यादा से ज़्यादा हंसने की कोशिश करें जिससे आपका तन मन प्रभूलित रहे ।

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