मौत कोरोना से नही ,ऑक्सिजन की कमी जानिये किससे होरही है
आज चारों तरफ बस एक बातें होरही है कोरोना वायरस और उसकी मौत की कहा जारहा है कोरोना वायरस की दूसरी लहर बहुत ख़तरनाक है । मीडिया दिखा रहा है रोज़ मौतें होरही है पर क्या ये मौत कोरोना वायरस से ही होरही है ?
पिछले साल और इस साल में बहुत फ़र्क़ है पिछले साल ना प्राणवायु (ऑक्सिजन) का हाहाकार था ना मौत का सैलाब , ना रेमडेसिविर जैसी कोई दवा थी ना कोई स्पेशल ट्रेटमेंट । 80% मरीज़ ख़ुद बा ख़ुद ठीक होजाते थे कुछेक की मौत भी हुई ।
पिछले साल मलेरिया की दवा को कारगर बताया जा रहा था ना कोरोना का कोई इंजेक्शन था ना कोई दवा फिर भी लोग ठीक होजाते थे इस साल लोग इंजेक्शन भी लगवा रहे हैं तरह तरह की दवा खिलाई जा रही है फिर भी मौत हो रही है ऐसा क्यों ?
या तो पिछले साल कोरोना नही था देश की जनता को परेशान कर दिया गया तरह तरह के प्रतिबंध लगा कर या इस साल है तो सरकारी लापरवाही से लोग मर रहे हैं । ना अस्पताल मे ICU बेड की पर्याप्त उपलब्धता है ना ऑक्सीजन की व्यवस्था है, जो डॉक्टर पिछले साल किसी कोरोना के मरीज़ को बिना PPE किट पहने छूते नही थे दूर से लोग भाग जाते थे आज वही लोग मरीज़ को छू रहे हैं देख रहे हैं वो भी बिना PPE किट के क्या आपको कुछ अजीब नही लगता ?
पिछले साल जहां आम डॉक्टर भी देखने से मना कर देते थे इस साल वो भी देख रहे हैं डॉक्टर और दवा कंपनियों की चांदी है लोग लूट मचाए हैं 20-20 लाख तक का ICU बेड बेचा जा रहा है आपदा में अवसर बना दिया गया है, डर इस क़दर फैला दिया गया है जिससे लोग मर रहे हैं । ज़रूरी नही मरने वाला कोरोना से ही मरे वो हार्ट फेल किडनी फेल लिवर, कैंसर इत्यादि की भी बीमारी से मर रहा है कौन जारहा है किसी का पोस्टमार्टम करवाने की पता चले मौत किस वजह से हुई है ।
अब आते हैं असल मुद्दे पर, इस बार मौतें सिर्फ़ दम घुटने से होरही है लोगों का कहना है मौत कोरोना से होरही है पर मेरा मानना है लोग कोरोना से नही डर से और हार्ट फेल से मर रहे हैं । गाँव की अपेक्षा शहर में ज़्यादा लोग मर रहे हैं ख़ास कर बड़े शहरों में ऐसा क्यों ?
बहुत से लोगो ने मुझसे सवाल पूछा है इस मसले पर, मेरा मत है कोरोना है ही नही , एक बार और बता दे ना मैं विज्ञान वर्ग का छात्र हूँ ना कोई डॉक्टर एक अदना सा अशराफुल मख़लूक़ात हूँ अल्लाह ने अक़्ल ओ शऊर दिया है उसी का इस्तेमाल कर रहा हूँ ।
अब तो बहुत सारे बुद्धिजीवियों ने भी ये कहना शुरू कर दिया है ये कोरोना नही है कोई साज़िश है भारत के 29 राज्यों में से केवल 5-7 राज्यों में ही ज़्यादा मौतें होरही है ऐसा क्यों ? जबकि महामारी पूरे देश में फैलनी चाहिए ना ।
कुछ लोगों का मत है ये आने वाले 5G की टेस्टिंग की वजह से है मुमकिन भी है । आपको बताते चले मोबाइल टावर का रेडिएशन किस तरह हमारे लिए ख़तरनाक़ है इस रेडिएशन से बहुत सारी बीमारी होती है अभी हम 4G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसकी फ्रिक्वेंसी 400mhz से लेकर 3.2ghz तक होती है इसी से हमारे फ़ोन को इंटरनेट की तेज़ गति मिलती है ।
जहाँ तक 5G का सवाल है इसकी रेडियो फ्रिक्वेंसी RF जो कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड EMF के अंतर्गत काम करती है ।
रेडियो फ्रिक्वेंसी किस तरह हमारे शरीर को नुक़सान पहुँचाती है ये जानने से पहले आपको बताते हैं रेडियो फ्रिक्वेंसी दो प्रकार की होती है एक इनोज़िंग (Ionizing Radio frequency) और दूसरी नॉन इनोज़िंग (Non ionizing Radio Frequency) नॉन इनोज़िंग रेडियो फ्रिक्वेंसी में Wifi, मोबाइल टॉवर इत्यादि आते हैं जबकि इनोज़िंग रेडियो फ्रिक्वेंसी में XRAY, अल्ट्रा वॉयलेट, एक्सयूवी किरण आते हैं जो कि ख़तरनाक़ होते हैं । ये रेडियो फ्रिक्वेंसी शरीर के लिए बहुत घातक होती है ।
अब ये देखना है मोबाइल टॉवर का रेडिएशन हमे नुक़सान कैसे पहुंचाता है । जब हम फ़ोन कॉल करते है तो हमारा फ़ोन मोबाइल एंटीना को संकेत देता है मोबाइल एंटीना मोबाइल टॉवर को मोबाइल टॉवर रेडियो फ्रिक्वेंसी को संकेत पास करता है रेडियो फ्रिक्वेंसी रेडियो फ्रिक्वेंसी ट्रांस रिसीवर को इस तरह चार चरण से गुज़रने के बाद हमारा मोबाइल कॉल करता है अब अगर जितना उच्च स्तरीय मोबाइल नेटवर्क रहेगा कॉल भी उतनी जल्दी लगेगी कॉल जल्दी लगेगी बात जल्दी होगी इसी आदान प्रदान में मोबाइल टॉवर और हमारे मोबाइल के बीच इतनी जल्दी जल्दी रेडियो फ्रिक्वेंसी ट्रांसफर होती है जिससे मोबाइल गरम होजाता है और ये हमारे शरीर को कान के ज़रिए हीट करने लगता है ।
अब अगर बात करें 5G नेटवर्क की तो ये सो प्रकार से काम करता है FR1 (Radio frequency 1) और FR2 (Radio Frequency 2) FR1 450Mhz से लेकर 6Ghz तक कि होती है जिससे 700mb/ps से 1Gb/ps की स्पीड मिलती है और FR2 24-25Ghz से लेकर 52.6Ghz तक कि होती है जेसिका sub-specttrum नाम 6Ghz होता है इसे फ्रीक्वेंसी डिवीज़न डुप्लेक्स (FDD) और टाइम डिवीज़न डुप्लेक्स स्पेक्ट्रम में बंटा होता है ।
कई अध्यनों के मुताबिक़ 5G नेटवर्क हवा से ज़रूरी तत्व सोख लेता है जिससे ग्रीनहाउस गैसों को नुक़सान पहुँचता है जिस कारण सांस लेने की समस्या पैदा होसकती है । ग्रीनहाउस गैसों के कारण कई हानिकारक तत्व हम तक नही पहुँच पाते हैं ओज़ोन परत हमे हानिकारक अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचाती है जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का ख़तरा रहता है । अभी 4G नेटवर्क जिसकी रेडियो फ्रिक्वेंसी मिलीमीटर वेव (Mmwaves)कम है जबकि 5G की मिलीमीटर किरणें (Millimeter wavs/Mmwaves) 24-25Ghz है जो बहुत ही हानिकारक है । अभी 4G के ही इस्तेमाल से ही हमें अनिद्रा, सरदर्द जी मिचलाना तनाव,अवसाद,सांस की बीमारी,नपुंसकता, वीर्य (Sperm) का ना बनना अंतसंबंध में अरुचि मूड ख़राब रहना, चिड़चिड़ा होना,हर चौथे व्यक्ति को होरही है साथ ही इससे सर का ट्यूमर और कैंसर का ख़तरा भी बना रहता है । 5G मिलीमीटर वेव्स वातावरण में मौजूद ग्रीनहाउस गैसों को सोख लेती है जिससे कार्बनडाइऑक्साइड गैस बढ़ सकती है ऑक्सीजन लेवल कम होसकता है नमी की मात्रा ज़्यादा होसकती है जो ऑक्सीजन का वाष्पीकरण कर देती है जिससे हमें सांस की समस्या होसकती है ।
आज कोरोना वायरस की दूसरी लहर में सबसे ज़्यादा मौतें ऑक्सिजन की कमी से होरही है होसकता है नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी ज़्यादा होगयी हो जिससे हवा में ऑक्सिजन की मात्रा कम होगयी हो ये मैं दावे से नही कह सकता बस एक अनुमान है मेरा ।
साथ ही ये भी मुमकिन है बायोमेडिकल वेस्टेज जो अस्पतालों से कचरा निकलता है उसको इधर उधर फेंकने से या भारी मात्रा में जलाने से भी ऐसा होसकता है जिस वजह से वातावरण में बैक्ट्रिया फैल गए हो । पर अभी तक जहां तक मैंने देखा सबसे ज़्यादा मौतें महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश, गुजरात में हुई है । इन जगहों पर परमाणु बिजली उत्पादन केंद्र है क्या ऐसा मुमकिन नही की इसमे किसी प्रकार का रिसाव हुआ हो जिससे ऐसा होरहा है,क्योंकि अगर ये कोरोना इतना ही ख़तरनाक़ है तो मौत महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश में ही ज़्यादा क्यों होरही है ? बाक़ी जगहों पर इतनी ख़बर नही सुनने को मिल रही है जितनी उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र, गुजरात से आरही है ऐसा लग रहा है अस्पताल जाने वाला कोई बच कर आयेगा ही नही , जो अस्पताल जाता है मर के आता है आख़िर हो क्या रहा है ? अगर ये महामारी है तो फिर ये शहरों में ही क्यों गाँव में ज़्यादा क्यों नही है, क्यों शहर के ही लोग दमतोड़ रहे हैं ?
Sawal ye hai ki sach agr ye sach to koi ispar research kyu nahi karta ....Or maut agr radition ki vajah se ho rahi hai to iske rokne ke liye upae kya hai
ReplyDeleteAbhi ye Confirm nahi hai ... Maut ki kya wajah hai allah hi behtar jane par itna main zarur kah sakta hoon Log Dar se mar rahe hain corona se nahi
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