संयुक्त परिवार में शादी करने के क्या फ़ायदे हैं इससे जानकर चौंक जायेंगे आप
शीतल (काल्पनिक नाम) की पढ़ाई पूरी होते ही घर वालों ने रिश्ता ढूंढना शुरू कर दिया।शीतल नाज़ों की पाली लड़की थी घर के काम से मतलब कभी नही था ना किसी बात का हुनर था कुछ था तो लम्बी ज़बान और खूबसूरती ए आसमान। शीतल के परिवार वाले चाहते थे कोई छोटा मोटा परिवार हो जहां शीतल की शादी होजाए ज़िन्दगी का गुज़र बसर अच्छे से हो लड़का पढ़ा लिखा और अच्छा कमाता हो।
शीतल के दिल में कुछ और ही था लड़का डेशिंग हो हैंडसम हो पैसे वाला हो और परिवार छोटा हो, शीतल की खूबसूरती को देख कर रिश्तों की लाइन लग गयी उसमे से आकाश (काल्पनिक नाम) का रिश्ता उसे पसन्द आया करोड़पति था हैंडसम था पर संयुक्त परिवार (Joint Family) से था आकाश को भी शीतल पहली ही नज़र में भा गयी। आकाश तीन भाई और 3 बहनों में सबसे बड़ा था साथ ही तीन चाचा चाची उनके बच्चे दादा दादी भी थे भला बड़े बेटे की पसन्द को कैसे इनकार किया जा सकता था आकाश और शीतल की सगाई होगयी दोनों आपस में बात करने लगे।
शीतल और आकाश में प्यार होगया दिल से नही शीतल को आकाश की दौलत से और आकाश को शीतल की खूबसूरती से इतने दिनों तक बात करके आकाश को शीतल की मंशा का अंदाज़ा भी नही हुआ कि वो क्या चाहती है या आकाश ने ये भी नही जानना चाहा कि शीतल को कुछ आता भी है या नही।
शादी का समय आगया दोनों की शादी होगयी शुरू शुरू में सब ठीक था पर महीना दो महीने बाद शीतल के नख़रे शुरू। शुरू में तो किसी ने काम के लिए नही टोका की नई बहू है उससे क्या काम करवाए शीतल तो आलसी और कामचोर हमेशा से थी शादी के बाद बस पति के साथ घूमना शॉपिंग करना मोबाइल पर गपशप करना यहाँ तक कि एक कप चाय बनानी नही आती थी उसे। जब ससुराल वाले काम के लिए कहते तो बहाना बना कर टाल देती, मजबूरी में कुछ दिन उसे काम करना पड़ा। पति से रोज़ कहने लगी मेरा दम घुटने लगा है मुझे अलग रहना है ये लोग मुझसे काम करवाते है क्या मे इनकी नौकर हूँ मैंने आज तक घर में एक काम नही किया यहां इनके लिए नाश्ता बनाओ खाना बनाओ ये करो वो करो अब बस बहुत होगया अगर तुम्हें मेरे साथ रहना है तो अलग रहना होगा वरना तुम इसी जगह रहो मैं अपने मायके जा रही हो तुम मेरा ख़र्च भेज दिया करना। आकाश के क़दमो से ज़मीन निकल गयी इतनी संस्कारी लड़की के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर । शीतल की ज़िद्द के आगे आकाश को झुकना पड़ा और वो परिवार से अलग रहने लगे। सुबह ऑफिस के समय भी शीतल आकाश को एक कप चाय नही बना कर देती थी उसे बाहर ही चाय पीनी पड़ती आकाश को समझ में आगया खूबसूरती के चक्कर में वो कहाँ फंस गया जब शीतल के घर वालों से शिकायत करता तो उसकी माँ का सीधा जवाब होता बेटा होटल से खा लिया करो दो ही लोग हो क्या होगा खाना बना कर। आकाश के खून के घुट पीकर ज़िन्दा रहा धीरे धीरे दिन गुज़रते रहें शीतल प्रेग्नेंट होगयी अब आकाश जब ऑफिस चला जाता तो वो घर पर अकेली रहती। अचानक से लॉक डाउन लग गया सब कुछ बन्द अब शीतल को मजबूरी में खाना बनाना पड़ता दो चार दिन बनाने के बाद उसकी तबीयत ख़राब होगयी। उसे याद आने लगा किस तरह शादी की शुरुआत में उसे टाइफाइड होने पर पूरे परिवार ने उसकी सेवा की थी कैसे उसका ख़्याल रखा था नन्द और भाभी ने मिल कर उसे संभाला कभी जल्दी कोई काम नही करने देती अगर एकाक दिन काम करवा ली तो उसमें क्या हर्ज था। इधर आकाश को शीतल के हाथ का खाना ही नही पसन्द आता होटल से खाने की आदत पड़ चुकी थी आए दिन किचकिच होती आकाश ने तंग आकर उसे छोड़ने का फ़ैसला कर लिया आकाश पछताने लगा उसने कितनी बड़ी ग़लती की खूब सीरत की जगह खूबसूरत को वरीयता देकर। शीतल की तबीयत ख़राब होगयी कोई देखभाल करने वाला नही उसे एहसास होने लगा ससुराल में सब कितना ख़्याल रखते थे जॉइंट फैमिली कितनी अच्छी होती है सब एक दूसरे का सहारा बनते हैं आज उसने बरगद के पेड़ की जगह ताड़ के पेड़ को वरीयता दी जो सिर्फ दिखने में खूबसूरत लगता है अकेले में पर ना हवा देसकता है ना छाया। शीतल का रोते रोते बुरा हाल वो तो ससुराल से लड़ कर अलग रहने आयी थी सोचा था अलग रहने का मज़ा है पर उसे एहसास होगया मज़ा तो संयुक्त परिवार में ही है एक ही छत के नीचे सभी रहते हैं ये वो गार्डेन है जहां विभिन्न पेड़ पौधे रहते हैं यहां तो सुनसान ना कोई बात करने वाला ना हालचाल लेने वाला। शीतल को समझ में आगया संयुक्त परिवार की ताक़त क्या है उसने आकाश से कहा मुझे घर जाना है आकाश ने कहा क्या करोगी घर जाकर तुम्हे अकेले रहना था रहो अब जिस परिवार के लिए मे बाहर नही गया उसे तुमने छुड़वा दिया। जिस परिवार के बिना ना मेरी सुबह होती थी ना शाम उससे तुमने अलग करवा दिया मेरी नज़र से अब तुम गिर चुकी हो मुझे अब तुमसे छुटकारा चाहिए। शीतल को जैसे सदमा लग गया हो आकाश के मुँह से ऐसा सुनकर ये वही आकाश है जो बाबू जानू शोना करते नही थकता था। आकाश ने अपनी मम्मी को कॉल लगाया और कहा वो आरहा है आपके पास सब कुछ छोड़ कर शीतल को भी छोड़ कर उससे ग़लती होगयी है वो खूबसूरती के नशे में अंधा होगया था। आकाश की मम्मी ने पूछा क्या हुआ उसने सब बता दिया प्रेगनेंसी से लेकर रोज़ की किचकिच तक कि। दूसरे ही दिन आकाश के मम्मी पापा उसे लेने आगए वो नज़रे नही मिला पा रही थी आकाश की मम्मी ने कहा बेटी जो हुआ उसे भूल जाओ तुम मेरी बेटी हो चलो अपने घर अपने परिवार वहाँ सब तुम दोनों का इंतेज़ार कर रहे हैं। दूसरे दिन वो दोनों घर आगए। शीतल को कोई उठने भी नही देता था उसकी इतनी सेवा सत्कार होने लगे बिस्तर पर ही उसे सब मिल जाता वो काम भी करना चाहती तो कोई करने नही देता जिस नन्द भाभी से वो लड़ के गयी थी सब उसकी आहोभगत करने लगे ऐसा लग रहा था कभी कुछ हुआ ही नही। शीतल की आंखें भर आयी उसे समझ में आगया पैसा खूबसूरती सब बेकार है अगर आपका परिवार आपके साथ नही है संयुक्त परिवार इतना अच्छा होता है। आज शीतल पूरे घर का काम अकेली ही करती है एक सुबह से उठ कर रात तक का काम उसे एहसास होगया की दुनिया की सबसे बड़ी दौलत संयुक्त परिवार है प्यार मोहब्बत अपनेपन से बढ़ कर कोई खूबसूरती कोई दौलत नही इसके आगे सब बेकार है।
वो सोचने लगी पता नही कैसे लोग अकेले रहते हैं परिवार को छोड़ कर अगर ये परिवार ना होता तो क्या वो ज़िन्दा बच पाती,क्या बीमार पड़ने पर अकेले उसकी देखभाल हो पाती यही तो परिवार है संयुक्त परिवार में रहने का अलग ही मज़ा है
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