इमाम हुसैन (अस) की शहादत पर महापुरुषों ने क्या कहा है

दस मुहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला में यज़ीद इब्ने मुआविया एक ज़ालिम आतंकवादी द्वारा इमाम हुसैन इब्ने अली अलैहिस्सलाम को कर्बला के मैदान में तीन दिन का भूखा प्यासा इकहत्तर (71) साथियों के साथ बेरहमी से शहीद कर दिया गया था जिसमे छह महीने का छोटा बच्चा भी था। इस दिन को आशूरा कहा जाता है और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का ग़म मनाया जाता है। 
महापुरुषों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लिए क्या कहा है आइये जानते हैं 

इमाम हुसैन की शहादत को नहीं भूले लोग

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी: 
इमाम हुसैन (स.अ.व.) ने अन्याय को स्वीकार करने के बजाय अपना बलिदान दिया. वह शांति और न्याय की अपनी इच्छा में अटूट थे.उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं. इमाम हुसैन के पवित्र संदेश को आपने अपने जीवन में उतारा है और दुनिया तक उनका पैगाम पहुंचाया है. इमाम हुसैन अमन और इंसाफ के लिए शहीद हो गए थे. उन्होंने अन्याय, अहंकार के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद की थी. उनकी ये सीख जितनी तब महत्वपूर्ण थी उससे अधिक आज की दुनिया के लिए ये अहम है.



महात्मा गांधी: मैंने हुसैन से सीखा कि मज़लूमियत में किस तरह जीत हासिल की जा सकती है. इस्लाम की बढ़ोतरी तलवार पर निर्भर नहीं करती बल्कि हुसैन के बलिदान का एक नतीजा है जो एक महान संत थे.

रवीन्द्र नाथ टैगोर: इन्साफ और सच्चाई को जिंदा रखने के लिए, फौजों या हथियारों की जरूरत नहीं होती है. कुर्बानियां देकर भी फ़तह (जीत) हासिल की जा सकती है, जैसे की इमाम हुसैन ने कर्बला में किया.

पंडित जवाहरलाल नेहरू : इमाम हुसैन की क़ुर्बानी तमाम गिरोहों और सारे समाज के लिए है और यह क़ुर्बानी इंसानियत की भलाई की एक अनमोल मिसाल है.
इंद्रेश कुमार, आरएसएस ः इमाम हुसैन पर मुसीबतें आई और उन्होंने इसको अपनी परीक्षा समझा, मुसीबत में कुछ लोग बिखर जाते हैं तो कुछ लोग निखर जाते हैं. उन्होंने दुनिया को रास्ता दिखाना था, जिसकी वजह से वो निखर गये. इमाम हुसैन आतंक के खिलाफ थे, प्यार मोहब्बात भाईचारे के रास्ते पर चलते थे, उनके अंदर एक रुहानियत ताकत थी.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद: इमाम हुसैन की कुर्बानी किसी एक मुल्क या कौम तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों में भाईचारे का एक असीमित राज्य है.

डॉ. राधाकृष्णन: इमाम हुसैन ने सदियों पहले अपनी शहादत दी, लेकिन उनकी पाक रूह आज भी लोगों के दिलों पर राज करती है.

स्वामी शंकराचार्य: यह इमाम हुसैन की कुर्बानियों का नतीजा है कि आज इस्लाम का नाम बाकी है, नहीं तो आज इस्लाम का नाम लेने वाला पूरी दुनिया में कोई भी नहीं होता.

सरोजिनी नायडू: मैं मुसलमानों को इसलिए मुबारकबाद पेश करना चाहती हूं कि यह उनकी खुशकिस्मती है कि उनके बीच दुनिया की सबसे बड़ी हस्ती इमाम हुसैन (अ:स) पैदा हुए. जिन्होंने संपूर्ण रूप से दुनिया भर के तमाम जातीय समूह के दिलों पर राज किया और करते हैं.

एडवर्ड ब्राउन: कर्बला में खूनी सहरा की याद, जहां अल्लाह के रसूल का नवासा, प्यास के मारे ज़मीन पर गिरा और जिसके चारों तरफ सगे सम्बन्धियों की लाशें थीं. यह इस बात को समझने के लिए काफी है कि दुश्मनों की दीवानगी अपनी चरम सीमा पर थी और यह सबसे बड़ा गम है जहां भावनाओं और आत्मा पर इस तरह नियंत्रण था कि इमाम हुसैन को किसी भी प्रकार का दर्द, खतरा और किसी भी प्रिय की मौत ने उनके क़दम को नहीं डगमगाया.

इग्नाज़ गोल्ज़ेहर : बुराइयों और हज़रत अली के खानदान पर हुए ज़ुल्म और प्रकोप पर उनके शहीदों पर रोना और आंसू बहाना इस बात का प्रमाण है कि संसार की कोई भी ताक़त इनके अनुयायियों को रोने या गम मनाने से नहीं रोक सकती है और अक्षर “शिया” अरबी भाषा में करबला की निशानी बन गए हैं.

डॉ के शेल्ड्रेक: इस बहादुर और निडर लोगों में सभी औरतें और बच्चे इस बात को अच्छी तरह से जानते और समझते थे कि दुश्मन की फौजों ने इनका घेरा किया हुआ है और दुश्मन सिर्फ लड़ने के लिए नहीं बल्कि इनको कत्ल करने के लिए तैयार हैं. जलती रेत, तपता सूरज और बच्चों की प्यास ने भी एक पल को इनके कदम डगमगाने नहीं दिए. हुसैन अपनी एक छोटी टुकड़ी के साथ आगे बढ़े, न किसी शान के लिए, न धन के लिए, न ही किसी अधिकार और सत्ता के लिए, बल्कि वे बढ़े एक बहुत बड़ी क़ुर्बानी देने के लिए. जिसमें उन्होंने हर कदम पर सारी मुश्किलों का सामना करते हुए भी अपनी सत्यता का कारनामा दिखा दिया.

चार्ल्स डिकेन्स : अगर हुसैन अपनी संसारिक इच्छाओं के लिए लड़े थे तो मुझे यह समझ नहीं आता कि उन्होंने अपनी बहन, पत्नी और बच्चों को साथ क्यों लिया! इसी कारण मैं यह सोचने और कहने पर विवश हूं कि उन्होंने पूरी तरह से सिर्फ इस्लाम के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान दिया, ताकि इस्लाम बच जाए.

अंटोनी बारा : मानवता के वर्तमान और अतीत के इतिहास में कोई भी युद्ध ऐसा नहीं है, जैसा इमाम हुसैन ने कर्बला में किया। उनकी शहादत मानवता के लिए है

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