जौनपुर राजनीतिक इतिहास का वो कौन अल्पसंख्यक नेता है जिसे ज़िलाध्यक्ष और फिर विधानसभा का प्रत्याशी बनाया गया
बतौर अल्पसंख्यक पहले कांग्रेसी जिलाध्यक्ष चुने गए फैसल हसन, यहां पढ़ें कैसा रहा 25 साल का उनका पार्टी में सफर
सैयद खादिम अब्बास रिज़वी
जौनपुर. पूर्वांचल के अहम जिलों में से एक जौनपुर में जहां 9 विधानसभा सीटें हें. अन्य जिलों की तरह ही कांग्रेस यहां भी अपनी खोई हुई जमीन एक बार फिर से पाने की कोशिश में है. अन्य पार्टियों से काफी पिछड़ चुकी कांग्रेस ने इसी उम्मीद में इस बार संगठन से जुड़े हुए और पुराने सिपाहसलार को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी है. कई वरिष्ठ नेताओं के संगठन में होने के बावजूद युवा फैसल हसन तबरेज जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने तो उन्होंने ऐसा करते हुए इतिहास भी बना दिया. क्योंकि ये पहली बार हुआ है कि जौनपुर जिले में किसी भी पार्टी ने अल्पसंख्यक चेहरे को मेन बॉडी का जिलाध्यक्ष चुना हो. उनका चुनाव खुद प्रियंका गांधी ने किया था. कांटो भरे रास्ते पर चलकर 39 वर्ष के फैसल हसन तबरेज पर खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस दिलाने के साथ ही संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी है.
21 फरवरी 1982 को शहर के ख्वाजादोस्त मोहल्ले में जन्में फैसल हसन तबरेज ने छात्र हुए ही राजनीति में कदम रख दिया था. साल 1996 में उन्होंने एनएसयूआई से बतौर कार्यकारिणी सदस्य अपने रा जनीतिक सफर की शुरुआत की. बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड के उन्होंने धीरे—धीरे संगठन में अपनी पहचान बनाई. ये अलग बात है कि उनके पिता शमशीर हसन जिले के पहले एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रहे लेकिन सरकारी नौकरी पाने के बाद उन्होंने खुद को राजनीति से अलग कर लिया. फैसल हसन ने हिंदी से एमए किया, राजनीति में रुचि रखने के चलते दोबारा राजनीतिक शास्त्र से एमए राज कॉलेज से ही किया. राज कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने छात्रसंघ चुनाव में पर्चा भरा लेकिन कुछ वजहों से चुनाव कैंसिल हो गया.
हालांकि उनकी एनएसयूआई में पकड़ मजबूत हो गई. जिसके बाद उन्हें साल 2000 में एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष बना दिया गया. इस दौरान उन्होंने संगठन को और मजबूत किया और बहुत से युवाओं को साथ जोड़ा. इसके चलते उन्हें साल 2004 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में देशभर के सबसे बेहतरीन एनएसयूआई जिलाध्यक्ष का अवार्ड दिया. उस समय एनएसयूआई की कमान राजस्थान के मौजूदा सीएम अशोक गहलोत के पास थी. एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके पास वर्ष 2008 तक रही. इसके बाद 2009 में उनका प्रमोशन किया गया और उन्हें यूथ कांग्रेस का जिलाध्यक्ष बना दिया गया.
फिर 2013 से 14 के बीच वो जिला उपाध्यक्ष भी रहे. इसके बाद उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में भी जगह मिली. स्टेट कोर्डिनेटर और प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए. इसी समय संगठन को मजबूती देने के लिए लखनऊ और प्रयागराज का प्रभारी नियुक्त किया गया. फिर फैसल हसन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने साल 2019 में पार्टी के जिलाध्यक्ष के लिए प्रियंका गांधी को इंटरव्यू दिया. संगठन को लेकर उनकी दूर दृष्टता को समझते हुए प्रियंका ने 18 अक्टूबर 2019 को उन्हें जिलाध्यक्ष बना दिया. फैसल हसन के पास जैसे ही ये जिम्मेदारी आई तो उन्होंने इतिहास भी बना दिया. क्योंकि न तो कभी कांग्रेस ने न ही किसी और पार्टी ने इससे पहले तक किसी अल्पसंख्यक को जिलाध्यक्ष कमान नहीं सौंपी थी.
फैसल हसन तबरेज के नाम की साल 2012 में विधानसभा चुनाव में सदर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चर्चा हुई थी लेकिन नदीम जावेद को टिकट मिला और उन्होंने जीत भी दर्ज की थी. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज ने यूपी सिटी न्यूज से बात करते हुए बताया कि वो आने वाले 2022 चुनाव में खुद को उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर रखते हैं और 9 विधानसभा सीट पर पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने में पूरी ताकत झोंक देंगे. उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों को हमेशा उठाया है और आगे भी उठाते रहेंगे. बता दें कि हाल ही में गुजरे पंचायत चुनाव में कांग्रेस ठीक—ठाक प्रदर्शन भी किया है. प्रधानी और बीडीसी पद के 100 के करीब उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है.।
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