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प्लीज़ हमे हमारी अज़ादारी लौटा दीजिए। मत कीजिए जदीद बेहुरमती।

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प्लीज़ हमे हमारी अज़ादारी लौटा दीजिए। अज़ादारी ए ईमाम हुसैन अस किसी तार्रुफ़ या किसी जदीद तरीक़े की मोहताज नही है। ईमाम हुसैन अस का ग़म एक ऐसा ग़म है जिसे किसी जदीद तरीक़े से महसूस करने की ज़रूरत नही है। क्या होगया है हमे आपको, किस दौड़ में शामिल होरहे हैं हम ? कहाँ है अब वो रौनक ए अज़ा ?  कहाँ है वो बुज़ुर्गों का ताबरुक़ात जो हमे अज़ादारी की शक्ल में मिला था ? आज जिस तरह से अज़ादारी होरही है क्या उस अज़ादारी से हम ईमाम अस को पुरसा दे रहे हैं या उनके नाम पर इवेंट कर रहे हैं। काली ईद के नाम से मशहूर कर दिया है मुहर्रम को, मुहर्रम शुरू होते ही कपड़ों की खरीदारी ख़ुद की सजावट शुरू होजाती है। जदीद जदीद तरीक़े ईजाद होरहे हैं। कोई थ्री डी ज़ुल्जनह ला रहा कोई सौ फीट का अलम उठा रहा है किसी को ताज़िया डिजाइनिंग वाला चाहिए कोई मातम की कोरियोग्राफी करवा रहा है कोई VR (वर्चुअल रियलिटी) पर ईमाम हुसैन अस का दर्द महसूस करवा रहा है। शबबेदारी के नाम पर बेदार करने की जगह महफ़िल सजाई जा रही है। वक़्त की पाबंदी का ख़्याल नही है ना ही अज़ादारी का ख़्याल है। नक़्शेबाज़ी की जा रही है एक्टिंग की जा रही है नौहे को नौहे की...

मोजिज़ा ए हिदायत, जब मिली साहू जी को रौज़ा ए मौला अली से बशारत

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मुहर्रम का आगाज़ हो चुका है। सफ़ीना ए निजात का काफ़िला निकल चुका है। कश्ती ए निजात बस आपके पास पहुंचने वाली होगी।  यही वो नाम ए हुसैन अस है जिसकी बशारत अल्लाह ने दी। यही वो हुसैन अस है जिनका झूला फरिश्तों के सरदार हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने झुलाया। यही वो हुसैन अस है जिनका नाज़ रसूलअल्लाह स.अ उठाया करते थे। यही वो हुसैन अस है जिनके नाना रहमत-उल-लील-आलमीन दोनों जहां के मालिक है बाबा शेरे ख़ुदा वली ए ख़ुदा मौला अली अस हैं। जिनकी माँ सिद्दिक़ा और ताहिरा और जन्नत की औरतों की सरदार दुखतर ए रसूल स.अ शहजादी फ़ातिमा ज़हरा है। जिनके भाई और जो ख़ुद भी जवानाने जन्नत के सरदार है। जिनके लिए हदीस ए कुद्दुस है अल्लाह फ़रमाता हैं। कि मैं एक छुपा हुआ ख़ज़ाना था, मैंने चाहा मैं पहचाना जाऊ तो मैंने नूर ए पंजतन अलैहिस्सलाम को हज़रत आदम से दो हज़ार साल पहले ख़ल्क़ किया। ये वो हुसैन है जो जिनकी पैदाईश पर अल्लाह ने फरमाया ऐ फरिश्तों ज़मीन पर जाओ आज मेरे हबीब मेरे नबी का नवासा तशरीफ़ लाया है उसकी मुबारक़बाद दे दो। जो फ़ितरुस को बाल ओ पर अता कर दें। जो राहिब की क़िस्मत को पलटा कर ला वालद को 7 औलाद अता कर दें। जो म...

जब्बार की बिटिया और रुख़सार की अम्मी (लखनऊ की बाजी) ने जब रखा ज़ुकरूवा के सीने पर क़दम, बवाल मचा दिया बे

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कौन कहता है आसमान में सुराख़ नही हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। कुछ इस तरह की लाइन को चरितार्थ करती है रुख़सार की अम्मी (लखनऊ की बाजी) अब आप पूछेंगे भला ये रुख़सार की अम्मी और जब्बार खान की औलाद कौन है ? चलिए मिलवाते हैं आपको रुख़सार की अम्मी जब्बार खान की मशहूर तमीजों तहज़ीब वाली बिटिया से।  जैसे जैसे रुख़सार बड़ी होरही है जब्बार खान की बेटी को रुख़सार की शादी की फ़िक्र सताने लगी है। एक तरफ ये तपती धूप और दूसरी तरफ रुख़सार का ढंकता रंग , रुख़सार की अम्मी को फिक्र के समुंदर में गोते लगवा रहा है।  हाथ तंग है अभी बिटिया जवान होरही है, रुख़सार का ब्याह रचाना है। इस प्रचंड गर्मी से निजात के लिए रुख़सार की अम्मी ने अभी कुछ दिन पहले ही एसी लगवाया है ताकि बिटिया को पसीना ना हो और बिटिया का रंग गोरा चिट्ठा बनना रहे।  हो भी क्यों ना हर माँ को अपनी औलाद की फिक्र रहती है फिर भला जब्बार खान की बिटिया अपनी औलाद के लिए फिक्रमंद क्यों ना होती ?  एकलौती होनहार बिटिया है जो एलएलबी कर रही है। वो भी लखनऊ यूनिवर्सिटी से। लॉक डाउन के दौरान घर में बैठी बैठी रुख़सार और उनकी अम्म...

क़िस्मत और उम्मीद पार्ट-1

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आर्यन पढ़ाई लिखाई में एवरेज था लेकिन उसका दिमाग़ तेज़ चलता था नया नया दौर शुरू हुआ था सोशल मीडिया का आर्यन के पास संसाधन नही था, ना फोन था मल्टी मीडिया ना कम्प्यूटर था। वो साइबर कैफे जाता अपनी दिन भर की पॉकेट मनी अपने शौक़ पूरे करने में लगाता था। सफ़र्रिंग करता तो यूट्यूब उस वक़्त बफरिंग करता। 2006 में ऑरकुट पर अपनी पहली सोशल मीडिया आईडी बनाई। धीरे धीरे 2007 में फेसबुक की चर्चा बढ़ी तो आर्यन फेसबुक पर आगया उस वक़्त आर्यन कक्षा नौ में था 2008-2009 के दौरान वो फेसबुक पर आया उसके बाद 2011 में उसके घर कम्प्यूटर आने से वो सोशल मीडिया पर अपना वक़्त गुज़ारने लगा किसी को ढूंढने के लिए। *फ्लैश बैक* आर्यन एक मुस्लिम लड़का था 2009 में उसका एक दोस्त उसे एक फ़ोन देता है रिलाइंस का उसमे वो रिलायंस की सिम लगा कर फ़ोन चलाने लगता है। नया नया फ़ोन चलाने का अनुभव, उसे मज़ा आता था। वो भी चाहता था कोई हो जिससे ख़ूब बातें करें sms करें। 17 मई 2009 को आर्यन के पास रात दो बजे एक दोस्त की कॉल आती है। आर्यन पढ़ाई कर रहा होता है उसका सपना सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का था लेकिन उसके पास इतना पैसा नही था कि वो अपनी मर्ज़ी ...

जब क़ुरआन का वाक़या हुआ हक़ीक़त में तब्दील, वो लौट आए हैं दुनिया को तबाह करने।

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15 साल का आर्यन गेम में व्यस्त था। तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया “GM” यानी गुड मॉर्निंग उसने भी उसी तरह abbreviation वर्ड्स का इस्तेमाल किया GM! “हे-ब्रो” कैसे हो ?  मस्त, और तुम ? “आई-एम-कूल ड्यूड!” “व्हाट्स-अप ब्रो?” नथिंग, जस्ट प्लेयिंग गेम ओह! यू-मीन JPG? JPG ? 🤔 यू से जस्ट प्लेयिंग गेम, ईट्स मीन!! ओह-आई-सी!! डूड यू आर वेरी ओल्ड यार। व्हाई ?? यार आजकल शॉर्ट फॉर्म का ज़माना है तुम लॉन्ग-सेंटेंस यूज़ कर रहे हो। ईट्स सो बोरिंग। हम लोगों के ग्रुप में कोई ऐसे बातें नही करता है सब “Abbreviated-words” का इस्तिमाल करते हैं। ओके-ब्रो ये हुई ना बात!! इस तरह आर्यन को भी शॉर्ट फॉर्म की लत लग गई। जो आर्यन क्लास में हमेशा टॉपर रहता था अब उसकी स्पेलिंग-मिस्टेक बढ़ने लगी थी। जब परीक्षा का समय आया आर्यन ने पढ़ा तो ख़ूब लेकिन लिखने की उसकी आदत तो शॉर्ट की बन चुकी थी वो भूल गया था कि GM नही Good Morning ही असल सेंटेंस है। एबरिवेशन-वर्ड्स ने उसके दिमाग़ को खोखला कर दिया था। उसकी प्रतिभा ख़त्म होने लगी थी। जो आर्यन कल तक होनहार था वो आज डब्बू बन कर रह गया था। जिसका डर था वही हुआ, आ...

करोड़ों पर भारी तरबीयत की सवारी (संस्कार) भाग-3

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करोड़ों पर भारी तरबीयत की सारी (संस्कार) भाग-2 इधर नरगिस के आने से साहिल के घर में रौनक आगयी थी। दोनों मिलकर इबादत करते ग़रीबो की मदद करते। साहिल बहुत पैसे वाला नही था लेकिन पढ़ा लिखा होशियार था।  उसके वालिद मग़रूर आलम साहब की किराने की दुकान थी।  अब्बू हम एक मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं।  क्यों बेटा ? अब्बू मुझे मेडिकल की दुकान का अच्छा अनुभव है और उसे हम अच्छे से चला सकते हैं। ठीक है बेटा खोल लो तुम अपना मेडिकल, लेकिन पैसे इतने है नही। अब्बू उसकी फिक्र आप ना करे हम लोग लोन ले लेंगे। नरगिस ने भी अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। बेटा नरगिस आप क्या करेंगी ? अब्बू अभी तो कुछ सोचा नही है। साहिल ने एक मेडिकल स्टोर खोल लिया था। इसी बीच रोशन के अब्बू के इंतेक़ाल की ख़बर आई।  बेटा हमे जनाज़े में शरीक़ होना होगा, अब्बु आप क्यों जाएंगे वो आपके लगते क्या थे ?  मशकूर आलम ने सारी दास्तां बयां कर दी।  बेटा वो तुम्हारे सगे चाचा है।  व्हाट, साहिल को जैसे शॉक्ड लगा हो।  अब्बू हमारे रिश्तेदार भी है, हाँ बेटा, वो हमारे सगे रिश्तेदार है लेकिन गुर्बत की वजह से उन्होंने क...

करोड़ों पर भारी तरबीयत की सवारी (संस्कार) भाग-2

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करोड़ों पर भारी तरबीयत की सवारी भाग-1 नरगिस पूरी रात बैचैन थी, सफ़ीना ने जब अपनी बच्ची को इस क़दर बैचैन देखा तो आकर उसके पास पूछा। नरगिस क्या बात है बेटा आज आप बहुत परेशान नज़र आरही है। नरगिस जो कि कभी झूठ नही बोलती थी लेकिन इस डर से की कहीं उसकी अम्मी उसे डांटे ना उसने झूठ बोल दिया कि उससे फीस का पैसा गिर गया है। जिसकी वजह से वो एग्जाम फीस जमा नही कर पाएगी। पहले तो उसकी अम्मी नाराज़ हुई लेकिन जब नरगिस के मासूम चेहरे को देखा तो फौरन उनका गुस्सा शांत होगया।  रो मत बेटा अल्लाह इंशाअल्लाह कोई सूरत ए हाल बना देगा उसपर भरोसा रखो। तुम तो जानती हो हमारे लिए पंद्रह हज़ार की रक़म बहुत बड़ी रक़म है।  तुम्हारे अब्बू एक मामूली टेलर हैं। और तुम जो मेहनत करके बच्चों को पढ़ाती हो उसी से घर का और तुम्हारी पढ़ाई का ख़र्च निकलता है। मेरी बहादुर बच्ची इस तरह रोते नही है, अल्लाह पर भरोसा रखो इंशाअल्लाह एक दिन सब ठीक होजाएगा।  नरगिस परेशान आख़िर वो कहाँ से इतनी जल्दी इतने पैसे लाएगी।  वो एक दवा की दुकान पर अपने अब्बू की दवा लेने जाती है, अक्सर ही वहाँ वो जाती है लेकिन उसे आज एक नया चेहरा ...

करोड़ों पर भारी तरबीयत की सवारी (संस्कार) भाग-1

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शहर का सबसे अमीर घराना था मग़रूर आलम का। मग़रूर साहब का एक ही एकलौता बेटा था ,रोशन और वो चाहते थे उसकी शादी किसी अच्छी लड़की से होजाए। मग़रूर साहब के एक भाई थे मशकूर आलम, दोनों भाइयों में बनती नही थी। मशकूर साहब गुर्बतज़दा तो मग़रूर साहब दौलत से हैरतज़दा थे। बेशुमार दौलत लेकिन भाई का उसमे कोई हक़ नही। शहर का दूसरा सबसे अमीर घराना था मैमुना बेग़म का, शौहर का नाम रफ़क़त अली था। रफ़क़त साहब कम पढ़े लिखे थे लेकिन मैमुना बेग़म एमबीए की हुई थी। दोनों की मोहब्बत की शादी थी जिनसे उन्हें एक औलाद थी ज़ीनत नाम की। ज़ीनत अपने बाप के घर की ज़ीनत थी। मैमुना ने गुर्बत में ज़िन्दगी गुज़ारी थी और अपने दम पर अमीर बनी थी, शौहर की एक छोटी सी नाश्ते पानी की दुकान को "ज़ीनत रेस्टॉरेंट" की पूरी चैन बनाने वाली औरत का नाम था मैमुना। मैमुना दो बहने थी, मैमुना और सफ़ीना, सफ़ीना सलीक़े की होशियार फरमाबरदार औरत थी। सफ़ीना ग़रीब ज़रूर थी लेकिन उन्होंने अपनी बच्ची नरगिस को " संस्कार " दिए थे। अब चूंकि दोनों की बच्चियां जवान होने लगी । क़िस्मत एक बार दोनों को फिर से मिलाने पर आमादा थी। जिस कॉलेज में मग़रूर आलम का ...

फर्राटेदार अंग्रेज़ी भोंकना सीखे। क्योंकि फर्राटेदार नही बोलोगे तो लोग थूक के आगे निकल जाएंगे

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आज कल गली कोने विभिन्न चौराहों पर एक चीज़ नज़र आती है, " फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलना सीखे" ।  अंग्रेज़ी फर्राटेदार ही क्यों बोले भाई ? कोई रेस है ? भाषा है ना फिर भाषा में कैसी रेस मुझे अभी संवेदना व्यक्त करनी है उसके लिए ज़रूरी है फर्राटेदार ही बोले तभी हम अंग्रेज़ की औलाद कहलायेंगे ? बड़ी बड़ी कम्पनीयों में छोटे छोटे संस्थानों में पहली शर्त फर्राटेदार अंग्रेज़ी का ज्ञान हो। अंग्रेज़ी में पहले हम वाक्य (sentence) समझते हैं ,  कथनवाचक वाक्य (Assertive sentence) प्रश्नवाचक वाक्य (interrogative sentence) आज्ञावाचक वाक्य (Imperative Sentence) विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory Sentence)  उसमे भी सकारात्मक वाक्य (Affirmative sentence) नकारात्मक वाक्य (Negative Sentence)..... फिर कालो का भेद पहचानते हैं।  भूतकाल Past Tense , वर्तमान काल Present Tense, भविष्य काल  Future Tense इसमें भी चार भेद पहचानते हैं Simple Tense सामान्य काल Continuous Tense अपूर्ण काल Perfect Tense पूर्ण काल Perfect Continuous tense अब यही सब भूत, वर्तमान भविष्य में घुसेड़ने के बाद क्रिया पहचानो,...

ग़लत दवा खाना, मौत से हाथ मिलाना। एंटीबायोटिक्स क्या है ? जाने यहां!!

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आज कल बीमारियों का जिस तरह से नीम हकीम ख़तरे जाँ द्वारा ईलाज किया जा रहा है वो एक गंभीर स्थिति है। बीमारी के नाम पर तरह तरह की जाँच साथ हो विभिन्न तरह की दवाएं ख़ासतौर पर  एंटीबायोटिक देने की सलाह डॉक्टर देते है लेकीन किस तरह के मर्ज़ में कैसी एंटीबायोटिक दी जाए वो नही जानते हैं। एंटीबायोटिक के जहां फ़ायदे है वहीं बहुत सारे नुक़सान भी है, एंटीबायोटिक क्या बैक्ट्रीयल इंफेक्शन में कारगर होती है वायरल इंफेक्शन में नही। बीमारी भी दो तरह की होती है वायरस द्वारा जनित और बैक्ट्रीया द्वारा जनित, वायरस वातावरण के दुष्प्रभाव से या किसी प्राकृतिक साधन से या लैब में मनुष्यों द्वारा विकसित होता हैओ जबकि बैक्ट्रिया ग़लत खान पान या किसी वजह से हमारे शरीर में बाहरी कारणों से उत्पन्न होता है जिसको लड़ने के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है। आइये जानते हैं एंटीबायोटिक के प्रकार, उसके उपयोग, उसके दुष्प्रभाव के बारे में। एंटीबायोटिक्स लेते समय मुझे क्या नहीं करना चाहिए ? एंटिबयोटिक्स लेने से पहले मुझे क्या जानना जरूरी है ? एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग क्यों किया जाता है? एंटीबायोटिक्स क्या हैं?...