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परीक्षा में बैठने से पहले ही आप फेल होजायेंगे अगर ऐसा करेंगे

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एक ज़माना था जब पढ़ाई होती थी अब का ज़माना है बस लड़ाई होती है । लड़ाई किस बात की नौकरी को हासिल करने की ,कभी संस्था से तो कभी कोर्ट से । नगीने मिलते थे नौकरी में अब सफीने मिलते हैं । नौकरी में पहले इतनी प्रतिस्पर्धा नही थी ना ही आज की तरह इतनी आधुनिकता और सुविधा फिर भी लोग बड़ी से बड़ी परीक्षा को पास कर लेते थे । तब हमारे बस संसाधन कम था ज्ञान अधिक था अब संसाधनों की कमी नही है ना ज्ञान और प्रतिभा की फिर भी हम फिसड्डी होते जा रहे हैं । सरकारी नौकरी के नाम पर गला काट प्रतिस्पर्धा में हम साम दाम दंड भेद सब कुछ लगा देना चाहते हैं , बस इसीलिए की एक सुविधाजनक नौकरी मिल जाएगी आराम से हर महीने पैसा आता रहेगा । या आईएएस आईपीएस बन कर अपनी मान प्रतिष्ठा को बढ़ा कर ज़माने पर रोब झाड़ा जायेगा । पहले सभी कहते थे बीए कर लो आगे चल कर आईएएस बन जाओगे अब तो बीए, बीएससी,बीकॉम बेकाम होगया है । आज आईएएस आईपीएस सबसे ज़्यादा टेक्निकल पृष्टभूमि वाले ,डॉक्टर इंजीनियर या किसी सम्मानित पद पर विराजमान व्यक्ति ही बन रहे हैं । दाल में नमक के बराबर एकेडमिक पृष्ठभूमि वाले परीक्षार्थियों का ही चयन होरहा है। सरकार भी ...

अल्लाह ने पहले ज़िन्दगी बनाई या मौत ? ज़िन्दगी सख़्त होती है या मौत ?

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क़ुरआन एक किताब नही एक पूरी क़ायनात है उसे समझने की ज़रूरत है पढ़ने की नही क्योंकि क़ुरआन का मायने ही पढ़ा हुआ है । क़ुरआन समझने के लिए आई है ताकि आप अपनी तक़लीफ़ों का हल इससे निकाल सकें । क़ुरआन की हर सूरह हमारी ज़िन्दगी से होकर गुज़रती है ज़रूरत है उसको समझने की पस अगर आपके दिल और नीयत पाक़ है तो आपको क़ुरआन और उसके लफ़्ज़ समझ आयेंगे वरना आपको बस एक अरबी क़िताब लगेगी । क़ुरआन ने कैसे हमारी ज़िन्दगी के हर मरहले को पहले ही बता दिया हमने कभी ग़ौर ही नही किया । सबसे पहले ग़ौर करते हैं क़ुरआन के दिल (सूरह यासीन) पर जिसका तर्जुमा कुछ इस तरह है *और हम जिस शख़्स को बहुत ज़्यादा उम्र देते है तो उसे खलक़त के उलट कर फिर बच्चों की तरह मजबूर कर देते हैं तो क्या वो लोग समझते नही*। इस आयत पर अगर ग़ौर करें तो तो बहुत सारे सवाल के जवाब आपको मिल जायेंगे बुजुर्गों का बीमार होना, बच्चों की तरह ज़िद्द करना पेशाब पैखाना बिस्तर पर कर देना जैसे बच्चे पैदा होते हैं मजबूर होते हैं वैसे ही उम्र ज़्यादा होने पर इंसान फिर से मजबूर होता है और ये क़ुदरत का नियम है जिसे अल्लाह ने क़ुरआन मे पहले ही बता दिया है । बुजुर्गों का इस उम्र म...

नशा किसी का भी हो जब सर पर चढ़ेगा तू घर को ही तोड़ेगा

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नशा किसी भी प्रकार का हो ख़तरनाक होता है बात करें अगर नशे के प्रकार की तो उसमें गांजा,अफ़ीम, हेरोइन, चिल्लम, कच्ची शराब, देसी शराब, अंग्रेज़ी शराब, तम्बाकू, गुटखा, सिगरेट, मुख्य है । कुछ स्थानीय नशा भी होता है कुछ आइंस्टीन की औलाद नया नया नशा ईजाद करते हैं जैसे सिगरेट की राख को चाय में घोल कर पीना आयोडेक्स को ब्रेड पर लगा कर खाना फँसाडील का सिरप पीना डाइजापाम का इंजेक्शन लगाना और भी बहुत सारे नशे करने के तरीक़े है और उनके कारोबारी है । अब बात करें अगर कैंसर की तो हर नशा अपने आप मे एक बीमारी है किसी प्रकार के नशे से आप ग्रेट खली नही बनते हैं । हर नशे की तरह जौनपुर में भी एक नशा होता है "दोहरे" का नशा जिसे जौनपुर वाले कैंसर का मुख्य कारक मानते है । जौनपुर में 3-4 दोहरा बहुत मशहूर माना जाता है शंकर, गणेश, राजू, का दोहरा उसके अतरिक्त जौनपुर में अब हर गली मोहल्ले में देखा देखी दोहरे का कारोबार फलने फूलने लगा । जिस तरह कोकाकोला बनाने की एक सीक्रेट रेसिपी होती है उसी तरह दोहरे की भी रेसिपी है जिस प्रकार बेनीराम की ईमारती कोई दूसरा नही बना सकता उसी तरह दोहरे के भी कुछ पद्धति ...

जब मज़दूर ने मालिक़ से पूछा आपको कितने पैसे चाहिए मैं देता हूँ

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हल जज़ाउल एहसान इल्ल एहसान  नेकी का बदला भला नेकी के सिवा कुछ है (सूरह रहमान) कभी कभी रिश्ते बनते नही है ख़ुद बा ख़ुद बन जाते हैं । इंसानियत के रिश्ते से बड़ा दुनिया में कोई रिश्ता नही होता है ।  ना कोई हिन्दू होता है ना कोई मुसलमान होता है  वक़्त पर जो काम आए वही बस इंसान होता है । ये कहानी नही एक सच्चाई है जो मैं आज आप लोगो को बताने जा रहा हूँ । इस कहानी है कि शुरुआत होती है लॉक डाउन से । मई में कोरोना और लोगों की मजबूरी चरम पर थी हर शख़्स मई में दो जून की रोटी को हैरान ओ परेशान था मार्च से लगे लॉक डाउन ने मई तक लोगो की क़मर ख़मीदा और हाल बोशीदा कर दी जो हालात पोशीदा दे वो मंज़र ए आम पर आगए । चारो तरफ अजीब सी खामोशी खाने की परेशानी और सुनाने को अपनी दुखभरी कहानी इसके सिवा कुछ नही बचा था । जो जहाँ था उसी जगह ठहर गया मानो वक़्त ने अपने आग़ोश में सभी को समेट लिया हो । रोज़ी रोटी और पैसा कमाने की चाह इंसान को उसके गाँव, शहर, वतन ले आयी थी इसी में आया था मेरे घर करंजाकला गाँव का जितेन्द्र नाम का एक मज़दूर । कहने को तो मज़दूर था पर दिल का राजा था । लॉक डाउन की फ़ुर्सत में घर पर ...

ओह मय गॉड इसने तो अक़ीदा जिहाद कर डाला अब क्या होगा

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लव जिहाद पर कानून बन गया क्योंकि इससे धर्मांतरण होता है । पर अक़ीदे जिहाद पर कानून बनाने के लिए ना सरकार ने कभी सोचा ना ही धार्मिक नेताओं ने । धर्म परिवर्तन से भी बड़ा मसला आस्था परिवर्तन का है उसपर कोई विचार नही करता । इस्लाम धर्म को मानने वाले मुस्लिम समुदाय में ही देख ले धर्म इस्लाम है समुदाय मुस्लिम है पर अक़ीदे जिहाद के चक्कर में खूंरेज़ी होजाती है । एक ही धर्म से भी होते हुवे शिया-सुन्नी अलग है क़ुरआन एक नबी एक अल्लाह एक बस अक़ीदा (आस्था) अलग होने से कई टुकड़ो में बंटे हुवे हैं । शिया सुन्नी में नही जा सकता सुन्नी अहले हदीस में नही जा सकता अहले हदीस देवबंदी को नही मानता देवबंदी बरेलवियों से नफ़रत करते है बरेलवी हनफ़ी को बुरा कहते है हनफ़ी चिश्तियों को बुरा कहते हैं उसमें भी सैय्यद में पठान को नही मिला सकते पठान अंसारियों को पसंद नही करते । सैय्यद, शेख़, पठान, अंसारी, मिर्ज़ा सिद्दीक़ी, क़ुरैशी, आलाने फलाने मतलब ये है कि सैय्यद को सैय्यद ही चाहिए हनफ़ी को हनफ़ी बरेलवी को बरेलवी देवबंदी को देवबंदी शिया को शिया ही । मजाल है कोई दूसरे अक़ीदे की लड़की से शादी करले । शिया सुन्नी मुसलमानों के...

जब पूर्वांचल विश्विद्यालय के लिए दान कर दिया था लगभग 800 बीघा ज़मीन । जानिए कौन है वो

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प्राचीनकालीन ऋषि यमदग्नि की तपोस्थली मुग़ल कालीन युग की प्रसिद्ध शिक्षास्थली जिसे शीराज़-ए-हिन्द जौनपुर के नाम से जाना जाता है । अपनी गंगाजमुनी तहज़ीब और भाईचारे के लिए विख्यात साथ ही राजनीतिक से लेकर बाहुबली माफियाओं का ज़िला जौनपुर । जनपद जौनपुर मुख्यालय के उत्तर में सुप्रसिद्ध माधोपट्टी गाँव जहाँ हर घर आला अधिकारी बस्ते है तो उत्तर में बसता है ज़िला जौनपुर का दिल जिसे जौनपुर रत्न कहा जाता है और वो है यहाँ पूर्वांचल विश्विद्यालय । पूर्वांचल विश्विद्यालय की स्थापना की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है जौनपुर को पूर्वांचल विश्विद्यालय कब कैसे मिला और किसकी भूमिका थी इसे दिलाने में आइये आपको बताते हैं । बात तक़रीबन दो दशक पहले की है तक़रीबन 1985-86 का दौर रहा होगा उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव पारित हुआ पर स्थान चिन्हित नही किया गया  । मऊ, ग़ाज़ीपुर, मिर्ज़ापुर, सोनभद्र, गोरखपुर, बलिया,वाराणसी, मुगलसराय, जौनपुर ,आज़मगढ़ इत्यादि ज़िलों का एक शिक्षण केंद्र बनने जा रहा था अब समस्या थी भूमि चिन्हित करने की जहाँ इसे स्थापित किया जा सके । उस समय मऊ से ...

इसने ख़्वाब में मेरी माँ का रेप किया है, ठीक है इसकी परछाई को 100 कोड़े लगाओ

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एक बार एक आदमी किसी को खींचते हुवे लेकर चला आरहा था हज़रत अली अलैहिस्सलाम का उधर से गुज़र होरहा था । हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने पूछा कहाँ से इसे इस तरह  ले जारहे हो ? उस शख़्स ने कहा या अली हम आपके ही पास अपना मुक़दमा लेकर आरहे थे । हज़रत अली अ. स. ने पूछा क्या माजरा है ? उस आदमी ने कहा या मौला अली इसने फलां शख़्स से कहा है कि इसने मेरी माँ के साथ ख़्वाब में ज़िना (रेप) किया है या अली अब आप ही इंसाफ करें । मौला अली ने फ़रमाया ठीक है इसे धूप में खड़ा करो और इसकी परछाई को 100 कोड़े लगाओ । उस शख़्स ने फ़रमाया या अली ये कैसे मुमक़िन है भला परछाई को कोड़े लगाने से इसे क्या चोट पहुँचेगी ? मौला अली ने फ़रमाया वही चोट इसे पहुँचेगी जो इसने ख़्वाब में तुम्हारे माँ के साथ ज़िना करके पहुंचाई है । वह शख़्स समझ गया कि हज़रत अली क्या कहना चाहते हैं उसने माफ़ी माँगी । हज़रत अली ने कहा ख़्वाब से किसी को कोई नुक़सान नही होता बस ख़्वाब ग़ुमराह कर देते हैं अपने ज़हन को पाक़ रखा करो वो दोनों वहाँ से चले गए । अब  हमारी अदालत का रुख़ करते हैं जहाँ किसी लड़की ने कह दिया इसने गंदे मैसेज करके मेरा शारिरिक शोषण करने की कोशि...

या नबी हम शर्मिंदा हैं, मुसलमान शैतान के कारिंदा हैं

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Add caption हज़रत मोहम्मद सल्लाहो अहले वा इलाही वस्सलम फ़रमाते हैं । वतन से मोहब्बत ईमान की निशानी हैं । जिस रसूल ने ये कहा हो वतन से मोहब्बत ईमान की निशानी है उसने सीधे तौर पर बता दिया अपने मुल्क़ अपने देश से मोहब्बत करो अब ये हम पर सुन्नत है कि अपने देश से मोहब्बत करें । ये वही रसूल हैं जिन्हें हर तरह की अज़ीयत दी गयी अज़ीयत देने वाले कोई ग़ैर नही अपने थे । वही अज़ीयत आज भी अपने दे रहे हैं । पूरी दुनिया में राहमतुल आलमीन बनकर आए नबी की उम्मत ही एक दूसरे को अज़ीयत दे रही है कभी ईरान-इराक़ कभी सऊदी-ईरान, सीरिया ,यमन, तुर्की , अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान यहाँ मुसलमान ही मुसलमान का दुश्मन है । मुसलमान ही एक दूसरे को अज़ीयत दे रहा है कभी जन्नत की लालच का ख़्वाब देखा कर क़त्लो ग़ारत करके कभी हूरों की आरज़ू लेकर बेगुनाहों का ख़ून बहाता रहता है । जिस नारा ए तक़बीर को हर घर में बुलंद होना था उसे जेहादी बना दिया गया अल्लामा इक़बाल ने क्या ख़ूब कहा है अजब तमाशा हुआ इस्लाम की तक़दीर के साथ क़त्ल ए शब्बीर भी हुआ तो नारा ए तक़बीर के साथ  क्या यही शिक्षा दिया था रसूल ने कि मेरे बाद उम्मत इतनी तब्दीलियाँ कर द...

होगए शहीद भाई, आज चेहलूम पर भाई को बहन रो पायी, सकीना भी थक के सोगयीं फिर मिली भईया हमे रिहाई

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चेहलूम या आर्बाइन क्या होता है और ये क्यों मनाया जाता है  हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे (नाती) हज़रत इमाम हुसैन अ.स. को दस मुहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला के तपते रेगिस्तान और कंटीले जंगल में इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को बहुत बेरहमी से तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया था जिसमे इमाम हुसैन के छह महीने के बच्चे शहज़ादे अली असग़र भी शामिल थे । यज़ीद की फ़ौज ने इमाम हुसैन के बच्चों पर भी रहम नही खाया था तीन दिन तक नहर पर पहरा लगा कर पानी रोक दिया नही कुछ खाने का था ना पीने का बच्चे प्यास से तड़प रहे हैं पर यज़ीद की फ़ौज ने पानी नही पिलाया । शहज़ादे अली असग़र जो कि केवल छः माह के थे जब प्यास से व्याकुल होकर तड़पने लगे इमाम हुसैन उन्हें मैदान ए कर्बला में यज़ीद की फौज के पास लाकर कहा "तुम्हारा गुनाहगार मैं हूँ तुम्हे मुझसे दुश्मनी है इस बच्चे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ये तीन दिन का भूखा प्यासा है इसे पानी पिला दो " इमाम हुसैन ने शहज़ादे अली असग़र को हाथों पर ऊपर उठा कर दिखाया कि देखो मेरे साथ ये नन्हा सा बच्चा है इसे पानी पिला दो चाहो तो मुझे क़त्ल कर दो तभी यज़ीद की फौज से आवाज़ ...

अरे तू तो Out Of Stocks होगया

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आधुनिकता की इस भागमभाग ज़िन्दगी में समय की बचत के लिए लोगों ने अपने बेड पर दुकानें सजा दी है । बस एक क्लिक पर सुई से लेकर जहाज़ तक आपके ऑर्डर पर आपके घर पहुंचा दिया जाता है । हम बात कर रहे हैं ऑनलाइन शॉपिंग की जो आज की आधुनिक तकनीक का सबसे उपयोगी माध्यम है । अपने रूम मे बैठे बैठे आप दुनिया की किसी भी वस्तु को ख़रीद सकते हैं ।  एक तरफ जहाँ चाइनीज़ सामानों का बहिष्कार किया जा रहा है चाइनीज़ ऐप्प पर रोक लगाई जा रही है वही सभी सामान भारत निर्मित लेने का आग्रह किया जा रहा है वही दूसरी तरफ "पिछला द्वार नीति" का स्तेमाल करके चाइनीज़ सामानों की ब्रांडिंग की जा रही है ।  ऑनलाइन शॉपिंग किसने नही की है सभी जानते हैं बिना बाज़ार जाए घर बैठे कुछ भी मंगवाया जा सकता है । आज ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर सबसे ज़्यादा मोबाइल ख़रीदे जाते हैं तरह तरह की कंपनियों के मोबाइल आपको मिल जाएंगे बाज़ार से कम दाम में । सबसे ज़्यादा रेडमी और रियल मी कंपनी के मोबाइल फ़ोन आकर्षित करते है पर ये हमे कैसे आकर्षित करते हैं आइये देखते हैं  । हमारा दिमाग़ जो देखता सुनता है उसे ही अपना लेता है । मीडिया और एडवरटा...

बेटा अली अकबर मार जाएगा ये ज़ईफ़ बाप तेरे जाने से , मुझे कुछ नही दिखता तेरे जाने से

अल्लज़ी खल्क़ल मौत वल हयात लि यबलुव-कुम अय्युकुम अहसनु अ-म-ला (सूरह मुल्क़ आयत 2)  ' तर्जुमा : वह हर चीज़ पर क़ादिर है जिसने "मौत" और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुम्हे  आज़माये कि तुम मे से काम में (नेकी की राह में )  सबसे अच्छा कौन है,और वा ग़ालिब बड़ा बख़्शने वाला है । क़ुरआन पाक़ की इस आयत पर ग़ौर करें तो अल्लाह फ़रमा रहा है उसने पहले "मौत" को पैदा किया । मतलब जब ज़िन्दगी का कोई अस्तित्व नही था तभी ये सुनिश्चित होगया था एक दिन मरना है और मरना निश्चित है इसीलिए इस आयत में ज़िन्दगी से पहले मौत का ज़िक्र आया है । जैसा कि मैंने पहले बताया था इमाम हुसैन (अ) की विलादत (जन्मदिन) पर ही आसमानी फ़रिश्ते जनाबे जिबरईल हज़रत मोहम्मद s.a.w.w. के पास आते हैं और इमाम हुसैन की शहादत की ख़बर देते हैं । किस तरह इमाम हुसैन को कर्बला में 3 दिन का भूखा प्यासा शहीद किया जाएगा कौन कौन लोग इमाम हुसैन के साथ रहेंगे क्या क्या होगा सारी बातें जनाबे जिबरईल पहले ही बता देते हैं । क़ुरआन की इस आयत और कर्बला के वाक़ये से ये तो निश्चित होगया अल्लाह ने सारी चीज़ें पहले से तय कर रखी है आप देखिए पैदाईश के ही दिन शहाद...

आसमानी फ़रिश्ते "जिबरईल" ने ऐसा क्या कह दिया जिसे सुन कर हज़रत मोहम्मद और हज़रत अली रोने लगे

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अल्लामा हुसैन वाएज़ काशेफ़ी लिखते हैं 3 शाबान 4 हिजरी को इमाम हुसैन (अ) की विलादत के बाद अल्लाह ने जिब्राईल (आसमानी फ़रिश्ते) को हुक़्म दिया कि ज़मीन पर जाकर मेरे हबीब हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.व.व) को मेरी तरफ़ से हुसैन की विलादत (पैदाईश) की मुबारक़बाद दे दो और साथ ही इमाम हुसैन की शहादत का वाक़या बता कर ताज़ियत (पुरसा) भी अदा कर दो  । जनाबे जिबरईल बा हुक्मे रब्बे जलील ज़मीन पर आए और उन्होंने हज़रत मोहम्मद (स) की ख़िदमत में पहुँच कर मुबारक़बाद पेश की । उसके बाद हज़रत मोहम्मद से फ़रमाया रा रसूले ख़ुदा आपको अल्लाह की जानिब से इमाम हुसैन की शहादत की इत्तेला दी जाती है । रसूले ख़ुदा हैरान अभी अभी तो हुसैन की विलादत (पैदाईश) हुई है और शहादत की भी ख़बर आगयी । हज़रत मोहम्मद साहब ने जनाबे जिबरईल (आसमानी फ़रिश्ते) से पूछा जिबरईल माजरा क्या है मेरे हुसैन की शहादत क्यों और कैसे होगी  ?  जनाबे जिबरईल ने अर्ज़ की या रसूले ख़ुदा बारोज़े जुमा 10 मुहर्रम सन 61 हिजरी को इराक़ के कर्बला का सहरा(रेगिस्तान और जंगल) जब आपके फ़रज़न्द इमाम हुसैन (अ) को बे जुर्म ओ ख़ता मैदाने कर्बला में कुंद ख़ंजर ( ऐसा जानवर ...

क़िस्मत का "घड़ा" शहज़ादा दर पर है खड़ा

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कहते हैं क़िस्मत का लिखा कोई टाल नही सकता । नेकी कभी ज़ाया नही जाती अल्लाह जानता है अपने बन्दों को कब क्या देना है । वो ना किसी को मग़रूर करने वाली अमीरी अता करता है ना मायूस होने वाली ग़रीबी । अल्लाह सत्तर माँओ से अफ़ज़ल है एक माँ अपने बेटे का दर्द बर्दाश्त नही कर सकती भला जो सत्तर माँओ से अफ़ज़ल हो यो  अपने बन्दों को कैसे टूटने  देगा । अल्लाह ने जब रूह ख़ल्क़ की थी तभी अपने बन्दों से अहद ले लिया था कि तुम्हे रूहे ज़मीन पर मुख़्तसर सी ज़िन्दगी के साथ भेज रहा हूँ । तुम्हे भूख, प्यास औलाद ग़ुरबत बीमारी तंगहाली से अज़मायेंगे जो मेरा बंदा होगा जो सब्र करेगा उसको उसका अज्र मिलेगा । एलिन और सिजलीन (अच्छे और बुरे नाम ए अमल को जहाँ लिखा जाएगा) में तुम्हारी हर कारस्तानी दर्ज होगी जो नेक अमाल करेगा अल्लाह उसको बेहिश्त अता करेगा और जो बद अमाल करेगा उसका ठीकाना जहन्नुम है । आज ऐसी ही एक वाक़या आप लोगो को बताते हैं कि अल्लाह जो करता है बेहतर करता है और अल्लाह कैसे अपने नेक बन्दों को मन्ज़िल ए मक़सूद तक पहुँचाता है । किसी देश में एक बादशाह रहता था बादशाह था । बादशाह ज़ालिम और लालची था एक बार वो श...

क्या इमाम हुसैन अ. स की अज़ादारी का "हमारी अर्थव्यवस्था" में योगदान है ?

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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना मोहर्रम होता है. इसे 'ग़म का महीना' भी माना जाता है. 12वीं शताब्दी में ग़ुलाम वंश के पहले शासक क़ुतुबुद्दीन ऐबक के समय से ही दिल्ली में इस मौक़े पर ताज़िये (मोहर्रम का जुलूस) निकाले जाते रहे हैं. उनके बाद जिस भी सुल्तान ने भारत में राज किया, उन्होंने 'ताज़िये की परंपरा' को चलने दिया. हालांकि वो मुख्य रूप से सुन्नी थे, शिया नहीं थे. पैग़ंबर-ए-इस्‍लाम हज़रत मोहम्‍मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन को इसी मोहर्रम के महीने में कर्बला की जंग (680 ईसवी) में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था. कर्बला की जंग हज़रत इमाम हुसैन और बादशाह यज़ीद की सेना के बीच हुई थी. आपको ये भी रोचक लगेगा मोहर्रम में मुसलमान हज़रत इमाम हुसैन की इसी शहादत को याद करते हैं. हज़रत इमाम हुसैन का मक़बरा इराक़ के शहर कर्बला में उसी जगह है जहां ये जंग हुई थी. ये जगह इराक़ की राजधानी बग़दाद से क़रीब 120 किलोमीटर दूर है और बेहद सम्मानित स्थान है. कर्बला में इमाम हुसैन की मज़ार पर लाखों की तादाद में शोक मनाते शिया मुसलमान मोहर्रम महीने का दसवाँ दिन स...