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कर्बला का अर्बाइन अपने आप में एक अजूबा है,जाने कैसे ?

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आलमे इन्सानियत और आलमे इस्लामियत का सबसे बड़ा इज्तेमा जहां एक वक़्त में विभिन्न रंगों नस्लों का जमावड़ा होता है, और अलहमदुलिल्लाह करोड़ों लोग एक वक़्त में एक जगह पे, हर जगह से, हर तरफ से बस एक सदा  लब्बैक या हुसैन बोलते चले आते हैं। जहां ना किसी मज़हब की क़ैद है ना नस्लों ज़बान की ना खाने की क़ैद है, ना रहने की। इराक़ का कर्बला शहर अर्बाइन (इमाम हुसैन अ.स. की शहादत के चालीसवें दिन) इराक़ के कर्बला शहर में, ज़ायर दुनिया के कोने कोने से पहुंचता है, ज़मीन फैलती जाती है और ज़ायरीन ए इमाम हुसैन अ.स. उसमें सिमटते जाते हैं। जिस शहर में पचास लाख से एक करोड़ से ज़्यादा लोग एक वक़्त में खड़े नही हो सकते हैं जहां जिस शहर की क्षमता ही पचास लाख से लेकर अधिकतम एक करोड़ लोग इकट्ठा हो सकते हैं उस शहर में एक वक्त में माशाअल्लाह सात से दस करोड़ लोग इकट्ठा होते हैं। जहां पीने का पानी पूरे इराक़ के लिए भी पर्याप्त नहीं हो पाता, वहां करोड़ो लोग पानी पीते हैं दैनिक क्रिया करते हैं, लेकिन पानी पर कोई असर नहीं होता। ये इमाम हुसैन अ.स. के रौज़े का चमत्कार है वरना 4 करोड़ 20 लाख की...

अतुल कुमार श्रीवास्तव जी ने बताया कर्बला इंसानियत की दर्स गाह है

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इंसान को बेदार तो हो लेने दो हर क़ौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन बेशक़ ईमाम हुसैन अस को मानने, समझने के लिए किसी क़ौम किसी मज़हब किसी फ़िरके की शर्त नही है, शर्त है इंसान होने की। जब आज लोग अपने बाप भाई पर नही रोते हैं उनके बलिदान को भूल जाते हैं तब उसी दुनिया में चौदह सौ साल पहले कर्बला की दर्दम्य, करुणामय घटना को याद करके आँसू बहाते हैं। कर्बला में हज़रत हुसैन और उनके इकहत्तर साथियों को बड़ी बेरहमी से तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया था जिसमे हज़रत ईमाम हुसैन का छह माह का बच्चा अली असग़र भी शामिल था। ग़ौर करने वाली बात है ना कर्बला की जंग हिन्दू की वजह से हुई ना रामायण महाभारत मुसलमानों की वजह से, जब जब किसी धर्म में उसके अनुष्ठानों को उसके कर्तव्यों को और धर्म की शिक्षा को बदला गया है तब तब बुराई पर अच्छाई पर विजय प्राप्त करने के लिए एक मसीहा उनके ही बीच से उठा है। कर्बला में भी मुसलमान थे, क़लमा पढ़ने वाले रसूलुल्लाह और उनकी शरीयत को मानने वाले लेकिन लोभी वैभिचारी, आतंकवादी यज़ीद ने ख़ुद को ख़लीफ़ा बनाने के लिए नवासे रसूल को बड़ी बेरहमी से तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद करवा दिया था,और...

हर काम में "इंशाअल्लाह" ज़रूर कहें। नामुमकिन को मुमकिन करता है इंशाअल्लाह

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भाई ये काम कर देना आज "इंशाअल्लाह" कर देंगे, यार कल सुबह कॉलेज चलना है "इंशाअल्लाह" चलेंगे। बस हम अब कॉलेज के अंदर दाख़िल होने वाले हैं, "इंशाअल्लाह" दाख़िल हो जाएंगे। मेरी शादी होने वाली है "इंशाअल्लाह"। यार ये तू हर बात मे इंशाअल्लाह क्यों कहता है ? क्या होजाता है इंशाअल्लाह कहने से ? बात बात पर इंशाअल्लाह कहता रहता है, अरे भाई ये सब हम लोगों ने बस में है फिर इंशाअल्लाह बात बात पर क्यों कहता है ? कॉलेज जाना हो, इंशाअल्लाह, सोने जाना हो, इंशाअल्लाह, शादी करना हो इंशाअल्लाह, कुछ सोचता हूँ तो इंशाअल्लाह। अरे भाई इतना इंशाअल्लाह मत कहा कर क्या होजाएगा अगर तू इंशाअल्लाह नही कहेगा आफ़त नही टूट पड़ेगी तुझपर। साहिल : क्या तुम जानते हो ये एक लफ़्ज़ कितना ज़्यादा पॉवरफुल है ? क्या तुम्हें पता है इस एक लफ़्ज़ से जनाबे सुलेमान की हसरत पर पानी फिर गया था ? क्या तुम्हें पता है बनी इसराइल के मग़रूर और मोमिन भाई का वाक़्या ? इंशाअल्लाह वो लफ़्ज़ है जो ख़ुदा की ज़ात को हर काम मे शामिल करता है बिना ख़ुदा के एक पत्ता भी नही हिल सकता। चार शख़्स ऐसे गुज़रे जिनकी हुकूमत प...

UAE ले लो UAE, पूरा "संयुक्त अरब अमीरात" मात्र साठ लाख डॉलर का

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यूएई के नाम लेते ही हमारे दिमाग़ में गगनचुंबी इमारतें, चमचमाती सड़के नवीन प्रौधोगिकी (टेक्नोलॉजी) से सुसज्जित समान अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कार, होटल,मॉल। अगर फैंटेसी की दुनिया को हक़ीक़त में देखना हो तो यूएई चले आए। सात प्रान्तों से मिल कर बना है यूएई। दुबई,अबुधाबी, शारजाह, अजमान,उम्म-अल-कहवां,फ़ुजैरिहा, रस-al-ख़ैमा!! सात अमीरातों यानी शेखों के मालिकाना हक़ वाले राज्य को मिला कर बना यूएई जिसकी जनसंख्या  9282000 है जिसका क्षेत्रफल 98648 किलोमीटर का है। यूएई अपनी खासियतों के लिए जाना जाता है, यूएई के दुबई शहर में दुनिया की सबसे ऊँची इमारत है जो आसमानों से बातें करती है बुर्ज़ ख़लीफ़ा बिल्डिंग दुनिया की सबसे ऊँची बिल्डिंग है। सुनने में जितना आसान लगता है बुर्ज़ ख़लीफ़ा को बनाना उतना ही कठिन था। हवा में झूलती इमारत को प्रकृति आपदा से बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी ख़ासकर भूकम्प के झटकों से। ऐसी नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया गया जो बिल्डिंग को आठ से दस डिग्री तक हवा में झूला सकती है पर उसपर हवा और भूकम्प का असर नही होगा। इतना ही नही बुर्ज़ ख़लीफ़ा को बनाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी उसे ठंडा रखना ...

बीबी को अपनाराज़ मत बताओ,सरकारी नौकर से दोस्ती मत करो,नए अमीर से क़र्ज़ मत लो

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हज़रत लुक़मान अलैहिस्सलाम जिन्हें हक़ीम लुक़मान भी कहते हैं। अपने बेटे से तीन अहम नसीहतें की और फ़रमाया इसे अपने दिलों दिमाग़ में बैठा लो। 1 अपना राज़ अपनी बीवी को मत बताओ 2 अवान (हुक्मरानों के दफ़्तरियो ,सरकारी नौकर) से दोस्ती मत करो। 3 नए और कम ज़र्फ़ दौलतमंद से क़र्ज़ मत लो। जनाबे लुक़मान जब दुनिया से रुख़्सत होगए, उनके बेटे ने ये नसीहतें आज़मानी चाही। एक दिन उसने एक जानवर को ज़िब्ह किया उसे एक बोरी मे डाला उसका मुँह बंद कुया और लाकर अपने कमरे में बेड के नीचे दफ़्न कर दिया और अपनी बीवी से फ़रमाया, ख़बरदार किसी को कानो कान ख़बर ना हो मैंने एक अपने दुश्मन को क़त्ल करके इसी कमरे में बेड के नीचे दफ़ना दिया है। अपने बग़ल में रहने वाले एक लड़के से दोस्ती कर ली जो बादशाह के दरबार में सरकारी मुलाज़िम था। उसके यहां आने जाने लगा और बहुत गहरी दोस्ती होगयी एक दूसरे पर दोनी जान निसार करते थे। उसी मोहल्ले में एक नौजवान रहता था जिसका कोई ख़ानदानी अता पता नही था उसने ख़ूब माल दौलत मेहनत मशक्क़त करके इकट्ठा कर रखी थी। एक दिन बीवी से झगड़ा हुआ, बीवी ने गुस्से में रोना धोना शुरू कर दिया और मोहल्ले वालों को इकट्ठा करके...

सैय्यद की कास्ट नही शादियों का टेलिकास्ट होगया है इसके बिना शादी नही होगी!

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अल्लाह ने क़ुरआन में बस लफ़्ज़े मुस्लमीन से हमारी रहनुमाई की है, ना कि शिया-सुन्नी से। ये तो हमने ज़माने में आने के बाद बना लिया उसी तरह सैय्यद,  ग़ैर-सैय्यद का भी शरीयत में कोई हुक़्म नही है ये हमने ख़ुद से बना लिया है। ना क़ुरआन से कोई इसकी दलील है ना हदीस से, ये सैय्यद ग़ैर सैय्यद का फ़र्क़ इंसानों का बनाया हुआ है। आज कल ये चलन बहुत ज़्यादा बढ़ गया है सैय्यद; ग़ैर-सैय्यद का लोग शादियां नही करते हैं। ऊँच नीच का फ़र्क़ हो गया है, ऐसा लगता है ग़ैर-सैय्यद अछूत हैं, उनसे शादी करने से किसी रोग में मुब्तिला हो सकते हैं।  जबकि इस्लाम में शादी का हुक़्म है, सैय्यद ग़ैर-सैय्यद का बिल्कुल नहीं। ये ज़माने ने सैय्यद ग़ैर-सैय्यद बना दिया है जिसका इस्लाम और शरीयत से कुछ लेना देना नही है। सैय्यद कौन होते हैं और कैसे होते हैं ? ये बहस, बहुत आम है कि सैय्यद मौला अली अलैहिस्सलाम की नस्ल से हैं। सैय्यद किसे कहते हैं और क्यों कहते हैं! अरब में बहुत सारे क़ाबिले थे उसमे से एक क़बीला था *क़ुरैश*  क़ुरैश के क़बीले का ताल्लुक़ रसूलल्लाह (स.अ.व.) से है, इसी क़बीले से जनाबे अब्दे मनाफ़ के बेटे, और उनके बेटे अबू...

मोहम्मद मुज़म्मिल ने किया "Impossible" को Pass-Able

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इम्पॉसिबल कुछ भी नही  कहते हैं इज़्ज़त दौलत और शौहर सौतन की तरह होती है एक आती है दूसरी रूठ जाती है पर मोहम्मद मुज़म्मिल ने इस इम्पॉसिबल को भी पॉसिबल बना दिया। कम उम्र में अगर इज़्ज़त शोहरत और दौलत तीनो प्राप्त होजाए तो लोगों के क़दम डगमगा जाते हैं परंतु मोहम्मद मुज़म्मिल ने इस इम्पॉसिबल को भी पॉसिबल बना दिया। जनपद जौनपुर के थाना कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले मोहम्मद मुज़म्मिल किसी परिचय के मोहताज नही है ये युवाओं का अटूट भरोसा और हौसलों की जान है।  शहर की मशहूर कोचिंग न्यू लाइट के शिक्षक साथ ही विभिन्न स्कूल-कॉलेज के अतिथि प्रवक्ता मोहम्मद मुज़म्मिल ने कम उम्र में अपनी मेहनत और क़ाबिलियत से अलग पहचान बना ली है। जौनपुर  में कॉमर्स के जाने माने शिक्षकों में इनकी गिनती होती है साथ ही ये मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं जो विभिन्न कार्यक्रमों में युवाओं को अभिप्रेरित करते हैं उनके अंदर हौसला भरते हैं लंबी उड़ान का। मोहम्मद मुज़म्मिल ने इज़्ज़त दौलत और शोहरत सभी कमाया है पर उनला कथन है ज्ञान शेयर करो लोगों की केअर करो इसी वक्तव्य को चरितार्थ करते हुवे  एक कल्याण संस्थान की स्थापना क...

दो ससुर नौ चचेरे ससुर का एकलौता दामाद, पचास लाख साली साले का अकेला जीजा जाने कौन है

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चलिए आज आपको सैर करवाते हैं ज़िला जौनपुर के इकलौते दामाद की। दो ससुर और नौ चचेरे ससुर पचास लाख से ज़्यादा साली साले के अकेले जौनपुरिया लल्लनटॉप जीजा की। नौ विधानसभा के ससुरों का अकेला ऐसा दामाद जहां ससुर का कभी आगमन नही होता। दामाद अकेला साली साले से लेकर उनके नाते रिश्तेदार तक को रेलमपेल चूतिया बना रहा है पर मजाल है इस दामाद की तरफ कोई आँख उठा कर देख ले। दामाद के पास कागज़ी किसी चीज़ की कमी नही है इतना सुविधा सम्पन्न दामाद है जिसकी सुविधाओं को देखने के लिए मिस्टर इंडिया वाला चश्मा लगाना पड़ता है। सुविधा तो ऐसी ऐसी है कि मुर्दे को ज़िन्दा कर दिया जाता है। हम बात कर रहे हैं दामाद ए आला लखनऊ वालों का साला आली जनाब ईज़्ज़त मआब जौनपुर ज़िला अस्पताल की जहां ईलाज के नाम पर खानापूर्ति अस्पताल के तरकश में बस पंद्रह अस्त्र रूपी दवाएं हैं कोई भी ऐसा भी मरीज़ आजाए ये पंद्रह दवाएं उसे यूं दी जाती है जैसे कांग्रेस वालों को टिकट दिया जाता है ले भाई तू भी ले ले। साठ प्रकार की मुफ्त जाँच करने के लिए  करोड़ो की मशीन लगी है पर केवल  काग़ज़ों पर उसकी जाँच होरही है। ज़िला अस्पताल में गंदगी के साथ ग...

अगर फेसबुक चलाते हैं तो आज ही करले ये काम वरना बन्द होजाएगा आपका एकाउंट

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फेसबुक अगर आप चलाते हैं तो आपके लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है। फेसबुक बराबर अपने फ़ीचर्स में बदलाव करता रहता है और अपनी सेवा एवं सुरक्षा को मज़बूती प्रदान कर रहा है। लगातार होती इस तब्दीलियों से अब आम कम पढ़े लिखे लोगों के लिए फेसबुक चलाना मुश्किल होने वाला है। फेसबुक आपकी सुरक्षा को सुनिश्चित करता है इसके लिए बहुत सारे सुरक्षा फ़ीचर्स ऐड कर रहा है इसी कड़ी में फेसबुक ने Unauthorized User login Security features में तब्दीली कर रहा है जिससे अगर आपका एकाउंट हैक भी होजाए तो कोई उसका इस्तेमाल ना कर सके। अगर आपका एकाउंट किसी कारणवश हैक होगया या किसी अन्य डिवाइस से आपका एकाउंट खोलने की कोशिश की गई तब फेसबुक आपको इसकी सूचना देगा जिससे सुनिश्चित कर सके कि उपयोगकर्ता (user) आप ही हैं। अगर आप फेसबुक का उपयोग फेसबुक लाइट, फेसबुक app, गूगल क्रोम, Uc browser, या किसी अन्य डिवाइस से उपयोग करते हैं फिर उसे लॉग ऑउट करके किसी अन्य फ़ोन,लैपटॉप या डिवाइस से लॉगइन करते हैं तो आपको इस तरह का एक मैसेज दिखाई देगा। अगर आप चाहते हैं कि आपका एकाउंट कोई हैक ना करे तो आपको दो चरणों वाले प्रामाणिक सुरक्षा कवच T...

जौनपुर से किस प्रत्याशी से जनता का कितना लगाव, जाने ग्राउंड रिपोर्ट

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शीराज़ ए हिन्द के नाम से विख्यात गंगा जमुनी तहज़ीब का मरकज़ इल्म ओ अदब का शहर नज़ाकत और नाफ़ाक़त कि बहती लहर, दिल में शहद ज़बान में ज़हर, वल्लाह उसपर चुनावी  क़हर कुछ ऐसा है हमारा शहर। हम बात कर रहे हैं जनपद जौनपुर की 9 विधानसभा वाला जौनपुर राजनीतिक गलियारे का भीष्म पितामह है यहां इस रणक्षेत्र से एक से एक राजनीतिक योद्धा निकले हैं। यही वो शहर है जहां भाजपा के दिग्गज नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी चुनाव हारें हैं। यही वो शहर है जहां योग से योगी तक लोदी से मोदी तक पधारे हैं। जनपद जौनपुर की सबसे ज़्यादा चर्चित हॉट सीट सदर की है जहां अबतक भाजपा कांग्रेस ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। सपा के उम्मीदवार की अभी घोषणा नही हुई है सपाइयों में खलबली मची हुई है इस देरी के कई मायने निकाले जाने लगे हैं। सैकड़ों उम्मीदवारों की उम्मीद का समुंदर है जौनपुर कौन कहाँ डूबेगा कौन कैसे निकलेगा इसका फैसला जनता करेगी। इसी कड़ी में सदर विधानसभा की जनता से रूबरू होकर यहां के हालात पर चर्चा की गई कि किस पार्टी के उम्मीदवार को इस बार वोट कर रहे हैं आप जनता का जवाब है पार्टी के नेता को नही अपने बीच के बेटा को वोट दें...

जौनपुर राजनीतिक इतिहास का वो कौन अल्पसंख्यक नेता है जिसे ज़िलाध्यक्ष और फिर विधानसभा का प्रत्याशी बनाया गया

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बतौर अल्‍पसंख्‍यक पहले कांग्रेसी जिलाध्यक्ष चुने गए फैसल हसन, यहां पढ़ें कैसा रहा 25 साल का उनका पार्टी में सफर       सैयद खादिम अब्बास रिज़वी जौनपुर.  पूर्वांचल के अहम जिलों में से एक जौनपुर में जहां 9 विधानसभा सीटें हें. अन्य जिलों की तरह ही कांग्रेस यहां भी अपनी खोई हुई जमीन एक बार फिर से पाने की कोशिश में है. अन्य पार्टियों से काफी पिछड़ चुकी कांग्रेस ने इसी उम्मीद में इस बार संगठन से जुड़े हुए और पुराने सिपाहसलार को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी है. कई वरिष्ठ नेताओं के संगठन में होने के बावजूद युवा फैसल हसन तबरेज जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने तो उन्होंने ऐसा करते हुए इतिहास भी बना दिया. क्योंकि ये पहली बार हुआ है कि जौनपुर जिले में किसी भी पार्टी ने अल्‍पसंख्‍यक चेहरे को मेन बॉडी का जिलाध्यक्ष चुना हो. उनका चुनाव खुद प्रियंका गांधी ने किया था. कांटो भरे रास्ते पर चलकर 39 वर्ष के फैसल हसन तबरेज पर खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस दिलाने के साथ ही संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी है. 21 फरवरी 1982 को शहर के ख्वाजादोस्त मोहल्ले में जन्में फैसल हसन तबरेज ने छात्र ...

अबे पार्टी कार्यालय नही, मीडियाकार्यालय चलो टिकट वहीं कंफर्म होगा

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नेता जी दौड़ते भागते एकदमे हंफ़ियाते हुवे न्यूज़ चैनल के दफ़्तर में पहुंचते हैं और पहुँचते ही फाइल इधर से उधर करना शुरू कर देते हैं। सभी कर्मचारी भौचक्के एकदम शेरबहादुर लकड़बग्घा की तरह खड़े काना फूसी करने लगते हैं। का बे पिन्टूवा तै साले तू कुछ ना चेप दिए नेता जी के ख़िलाफ़। नाही बे हम तो कुछ ना लिखे है विनोदवा से पूछ उ साला कुछ भी  रेलमपेल लिख डालत है।  अबे, अबे, अबे सुनबे बुजरो के , तै तो कुछ ना लिखे है नेतवा के ख़िलाफ़। नही बे हम लिखे हैं।  पक्का संपादक जी लिखे होइए देख कुकुर की नाई मुँह चियार के कैसे खड़े हैं।  ऐ साहेब, ऐ साहेब, अबे कपिलवा सुनबे, क्या कहा तुमने मुझे, सॉरी कपिल सर मुँह से एकदम अचानक निकल गया मेरी ज़बान फिसल गई मेरा टेलीप्रॉम्प्टर ख़राब होगया। कपिल सर इस पूरे ऑफिस में आपसे ज़्यादा होनहार क़ाबिल ऊर्जावान कोई नही है ज़रूर आपने ही नेता जी के किसी कारनामे की पोल खोली होगी। अबे धीरे बोलो यार तुम तो मरवाने पर तुले हुवे हो मुझे, अंदर की बात बताए, हमे लिखना नही आता तुम्ही लोगों के लेख को अपना नाम लगा कर चेप देते हैं,, प्लीज़ यार बुरा मत मानना, भूतनी के तुम्ही ...

हम तो चले थे जानिब ए मंज़िल, पार्टीयां मिलती गई दरी बिछाते चले गएं।

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मुस्लिम नेताओं को है वज़ीर ए आज़म बनने का जुनून मुसलमानों का मुद्दा पुकारे इन्ना लील्लाहे वा इन्ना इल्लाहे राजेऊन  विधानसभा चुनाव जैसे जैसे क़रीब आरहा है मुस्लिम क़यादत और सियासत की आवाज़ बुलंद होने लगी है। लोगों को पिछड़े ग़रीबों का दर्द सताने लगा है पर मुसलमानों का दर्द नही उन्हें बस दर्द है मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का। मुस्लिम वोट पूरा चाहिए पर सामाजिक हिस्सा शून्य देना है। अखिलेश यादव हो या ओवैसी मायावती हो या प्रियंका गाँधी योगी हो भुक्तभोगी सभी को मुस्लिम वोट चाहिए। हर पार्टी बा आवाज़-ए बुलंद कह रही है मुस्लिम को मिलाना है भाजपा को हराना है पर कोई ये नही कहता मुस्लिम को मिलाना है देश को बचाना है। कोई पार्टी देशहित की राजनीति नही कर रही अब राजनीति पिछड़े, दलित, क्षत्रिय, ब्राह्मण, अल्पसंख्यक की होकर रह गयी है। शिक्षा चिकित्सा सामाजिक सरोकर, न्याय और सुरक्षा एवं रोज़गार का मुद्दा किसी   सी ग्रेड की अभिनेत्री के कपड़ो की तरह ग़ायब है। राजनीति अब ख़ानदानी विरासत होगयी है जिस सीट से हम चुनाव लड़ रहे हैं उससे हम ही लड़ेंगे या हमारे परिवार का सदस्य लड़ेगा अगर इस पार्टी ने ...

तो इस तरह करते हैं माँ बाप अपने बच्चों का घर बर्बाद

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विशाल के घर जाते ही अकरम ने विशाल की हाल चाल पूछी! सालों बाद अमेरिका से आए अपने जिगरी दोस्त को देख कर भी जब विशाल ने कोई प्रतिक्रिया नही दी तो अकरम ने पूछ ही लिया। विशाल सब ख़ैरियत है ना ? विशाल कुछ कहे बिना रोने लगा और रोने और रोते रोते कहने लगा यार अदिति ने भाग के ग़ैर बिरादरी में शादी करने की ज़िद कर रही है कह रही है शादी करेंगे तो उसी लड़के से करेंगे वरना अपनी जान दे देंगे। विशाल की बात सुनकर अकरम सन्न रह गया! उसने पूछा अदिति कहाँ है ? वो अपने रूम में होगी तू उसे समझा यार वरना मेरी समाज में क्या इज़्ज़त रह जाएगी। अकरम अदिति के पास जाता है अदिति अकरम को देख कर सलाम करती है, आप अमेरिका से कब आए अकरम चाचा ? बस बेटा आज ही आया और आते ही विशाल से मिलने चला आया पर यहाँ तो सब उल्टा पुल्टा है ये क्या सुन रहा हूँ बेटा क्या ये सच है ? हाँ चाचा ये सच है! पर बेटा क्यों? तुम्हारे घर खानदान में नाते रिश्तेदार में इतने अच्छे अच्छे लड़के हैं फिर ग़ैर बिरादरी में शादी क्यों कर रही हो ? लड़के! कौन से लड़के कैसे लड़के मम्मी के पास बैठो तो पापा के ख़ानदान की बुराई पापा के पास बैठो तो मम्मी की ख़ानदान की...

ये बुज़ुर्ग किसी अनमोल धरोहर से कम कम नही है इनका संरक्षण करें। बुज़ुर्गों के साथी बने

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बहुत सारे रिश्ते हैं पर हर रिश्ते से परे दोस्ती का रिश्ता है। दोस्ती का रिश्ता क्यों ज़रूरी है ये उन बुज़ुर्गों से पूछो जिनके बच्चे जवान होकर किनारे होगए हैं। वो किसके साथ अपने दिल की बात करें किससे कहें अकेले वक़्त गुज़रना बहुत मुश्किल होता है। जवान है तो कई सारे दोस्ती के रंग देखेंगे बहुत सारे साथी मिलेंगे पर जैसे जैसे उम्र गुज़रती जाती है किसी ऐसे हंसी ठिठोली करने वाले साथी की ज़रूरत बढ़ती जाती है जो बिना कहे उसका दर्द, उसकी बीमारी उसकी परेशानी उसके हालात हो समझ ले। किसी का कोई कॉलेज का साथी होता है कोई साथ मे काम करने वाला कोई दूर का कोई आस पड़ोस का। बुज़ुर्गों के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी आस पड़ोस के दोस्त होते हैं जिसके साथ वो वक़्त बिता सकें अपने दुख दर्द को साझा कर सकें बच्चे तो बुज़ुर्गों को बुढ़ा समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते है। उनकी हर बात सुई की तरह चुभने लगती है आज के नौजवान और बच्चे तो तूनकमिज़ाज होते हैं उनसे कुछ कहोगे तो वो उल्टा आप पर ही चिल्लाने लगेंगे।  इंसान अपनी बुज़ुर्गी में बिल्कुल बच्चे की तरह होजाता है अल्लाह ने क़ुरआन के सूरह यासीन में फ़रमाया "हम इंसान की उम्र को उसकी...

एक ऐसा ज़िला जहाँ हिन्दू मुस्लिम का अनोखा और बेमिसाल है भाईचारा

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नफ़रतें क़दम बढ़ा रही हर तिफ़लों पीरों जवां के साथ मोहब्बत की हवा बहाएंगे हम ऐसी कई शमा के ख़िलाफ़ नफ़रतें बिक़ जाती हैं मोहब्बत के ख़रीददार नही मिलते झूठ के आगे सच के बाज़ार नही दिखते। आज सारे देश में हिन्दू मुस्लिम के बीच एक ऐसी गहरी खाई बना दी है जिसे पाटना बहुत मुश्किल है। ना वो होली की गुझिया रही ना दीवाली की मिठाई ईद की सेंवई पर भी अब होने लगी लड़ाई। जिस तेज़ी से नफ़रत पैर फैला रही है लगता है सारी दुनिया को अपनी ज़द में ले लेगी। इन नफ़रतों से परे उत्तर प्रदेश में एक ऐसा ज़िला है जो हिन्दू मुस्लिम एकता की एक जीती जागती मिसाल है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं इल्म ओ अदब के शहर हर मज़हब ओ मिल्लत के मर्कज़ गंगा जमुनी तहज़ीब की धूरी शीराज़ ए हिन्द जौनपुर की जिसके बिना भाईचारे की मिसाल है अधूरी। एक ओर जहां राजनीति ने हिन्दू मुस्लिम के बीच इतनी दूरी बना दी है जिससे ना त्यौहारों की रौनक बची ना पकवानों की लज़्ज़त। पर ये जौनपुर के लिए अपवाद है,जौनपुर में आज भी हिन्दू मुस्लिम भाईचारा उसी तरह क़ायम है। इस्लाम की चौक के इतिहासिक चेहल्लुम का ताज़िया बनाने वाले महशर हुसैन और उनके पुत्र नुसरत अब्बास ने बताया कि ...

मशीनों पर सवारी एंटीबायोटिक से यारी, कहीं ये ना पड़ जाए हमे भारी

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नीम हक़ीम ख़तरे जां, ये कहावत तो आपने ज़रूर सुनी होगी। आज इस आधुनिक मशीनीकरण के दौर में ये कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होने लगी है। हर गली मोहल्ले में मुन्ना भाई जैसे डॉक्टरों की फ़ौज खड़ी है साथ ही उनके पीछे खड़ा है पैथोलॉजी जैसा मौत का साम्रज्य। अप्रशिक्षित और अशिक्षित पैथोलॉजी वालों ने तो कितनो को बिन बीमारी के ही बीमारी देकर मार डाला। माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक्निकल कम्पनी कर मालिक बिलगेट्स ने कहा कम्प्यूटर और तकनीक से कुछ भी संभव है, कम्प्यूटर ने इंसान को स्मार्ट बना दिया है। इसपर अली बाबा ग्रुप के मालिक़ जेक मा ने कहा कम्प्यूटर और तकनीक से चाहे जितनी तरक़्क़ी कर ली जाए पर *कम्प्यूटर कभी इंसान को नही बना सकता, हाँ इंसान ज़रूर कम्प्यूटर को बना सकता है नई नई तकनीक पैदा कर सकता है, कम्प्यूटर जितना भी स्मार्ट होजाए पर रहेगा इंसान से पीछे ही*। अब आते हैं हम असली मुद्दे पर भारत में 57.3% प्रतिशत फ़र्ज़ी डॉक्टर है जिनके पास किसी प्रकार की कोई डिग्री नही है उसमें भी 31.7% डॉक्टरों ने केवल हाई स्कूल तक ही शिक्षा हासिल की है ये WHO द्वारा भारत में किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट कह रही है। अब आप बताइय...

क़दीम, कसीर, हीन,मुद्दत,ज़माना क्या है। वो बातें जो हमे नही बताई गई पार्ट-2

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आज जो इस्लाम का चेहरा दुनिया को दिखाया जा रहा है इस्लाम बिल्कुल उसके उलट था पर आज के जाहिल मुसलमानों ने उस इस्लाम का हुलिया बिगाड़ दिया। इसी दिन के लिए रसूल ए ख़ुदा (सअ) ने फ़रमाया था मैं तुम्हारे दरम्यान दो ज़िलाक़द्र चीज़े छोड़े जा रहा हूँ अगर इससे जुड़े रहोगे तो कभी रुस्वा और ज़लील नही होंगे। एक क़ुरआन और दूसरी अहलेबैत अलैहिस्सलाम। पर अफ़सोस ना आज का मुसलमान क़ुरआन को समझ सका ना अहलेबैत को। जिस यूरोप में आज वैज्ञानिकों की भरमार है कभी आप ने सोचा है कि सत्तरहवी शताब्दी से पहले तक कोई वैज्ञानिक क्यों नही हुआ ? छठी शताब्दी से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक इस्लाम का गोल्डन पीरियड था उस वक़्त दानिशवरों की फौज खड़ी होगयी थी जिसमे फ़ादर ऑफ केमेस्ट्री जाबिर इब्ने हय्यान (जिसे यूरोप में जबर या जेब के नाम से जाना जाता है) अल किन्दी, फादर ऑफ मेडिसिन अबू अली सेना (अविसिन्ना) सर्जरी के मास्टर अल जवाहिरी, अलजेब्रा का ईजादकर्ता अल-ख़्वारिज़्मी, उमर ख़य्याम, फ़ादर ऑफ ऑप्टिक्स इब्ने अल हैथम (अलहज़ेन), इस्हाक़ बिन अली, जाफ़र मोहम्मद इब्ने मूसा, नसरुद्दीन तूसी, कुतुबुद्दीन अल शीराज़ी ने इंद्रधनुष बनने की सही वजह दुनिय...