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अबे पार्टी कार्यालय नही, मीडियाकार्यालय चलो टिकट वहीं कंफर्म होगा

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नेता जी दौड़ते भागते एकदमे हंफ़ियाते हुवे न्यूज़ चैनल के दफ़्तर में पहुंचते हैं और पहुँचते ही फाइल इधर से उधर करना शुरू कर देते हैं। सभी कर्मचारी भौचक्के एकदम शेरबहादुर लकड़बग्घा की तरह खड़े काना फूसी करने लगते हैं। का बे पिन्टूवा तै साले तू कुछ ना चेप दिए नेता जी के ख़िलाफ़। नाही बे हम तो कुछ ना लिखे है विनोदवा से पूछ उ साला कुछ भी  रेलमपेल लिख डालत है।  अबे, अबे, अबे सुनबे बुजरो के , तै तो कुछ ना लिखे है नेतवा के ख़िलाफ़। नही बे हम लिखे हैं।  पक्का संपादक जी लिखे होइए देख कुकुर की नाई मुँह चियार के कैसे खड़े हैं।  ऐ साहेब, ऐ साहेब, अबे कपिलवा सुनबे, क्या कहा तुमने मुझे, सॉरी कपिल सर मुँह से एकदम अचानक निकल गया मेरी ज़बान फिसल गई मेरा टेलीप्रॉम्प्टर ख़राब होगया। कपिल सर इस पूरे ऑफिस में आपसे ज़्यादा होनहार क़ाबिल ऊर्जावान कोई नही है ज़रूर आपने ही नेता जी के किसी कारनामे की पोल खोली होगी। अबे धीरे बोलो यार तुम तो मरवाने पर तुले हुवे हो मुझे, अंदर की बात बताए, हमे लिखना नही आता तुम्ही लोगों के लेख को अपना नाम लगा कर चेप देते हैं,, प्लीज़ यार बुरा मत मानना, भूतनी के तुम्ही ...

हम तो चले थे जानिब ए मंज़िल, पार्टीयां मिलती गई दरी बिछाते चले गएं।

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मुस्लिम नेताओं को है वज़ीर ए आज़म बनने का जुनून मुसलमानों का मुद्दा पुकारे इन्ना लील्लाहे वा इन्ना इल्लाहे राजेऊन  विधानसभा चुनाव जैसे जैसे क़रीब आरहा है मुस्लिम क़यादत और सियासत की आवाज़ बुलंद होने लगी है। लोगों को पिछड़े ग़रीबों का दर्द सताने लगा है पर मुसलमानों का दर्द नही उन्हें बस दर्द है मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का। मुस्लिम वोट पूरा चाहिए पर सामाजिक हिस्सा शून्य देना है। अखिलेश यादव हो या ओवैसी मायावती हो या प्रियंका गाँधी योगी हो भुक्तभोगी सभी को मुस्लिम वोट चाहिए। हर पार्टी बा आवाज़-ए बुलंद कह रही है मुस्लिम को मिलाना है भाजपा को हराना है पर कोई ये नही कहता मुस्लिम को मिलाना है देश को बचाना है। कोई पार्टी देशहित की राजनीति नही कर रही अब राजनीति पिछड़े, दलित, क्षत्रिय, ब्राह्मण, अल्पसंख्यक की होकर रह गयी है। शिक्षा चिकित्सा सामाजिक सरोकर, न्याय और सुरक्षा एवं रोज़गार का मुद्दा किसी   सी ग्रेड की अभिनेत्री के कपड़ो की तरह ग़ायब है। राजनीति अब ख़ानदानी विरासत होगयी है जिस सीट से हम चुनाव लड़ रहे हैं उससे हम ही लड़ेंगे या हमारे परिवार का सदस्य लड़ेगा अगर इस पार्टी ने ...

तो इस तरह करते हैं माँ बाप अपने बच्चों का घर बर्बाद

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विशाल के घर जाते ही अकरम ने विशाल की हाल चाल पूछी! सालों बाद अमेरिका से आए अपने जिगरी दोस्त को देख कर भी जब विशाल ने कोई प्रतिक्रिया नही दी तो अकरम ने पूछ ही लिया। विशाल सब ख़ैरियत है ना ? विशाल कुछ कहे बिना रोने लगा और रोने और रोते रोते कहने लगा यार अदिति ने भाग के ग़ैर बिरादरी में शादी करने की ज़िद कर रही है कह रही है शादी करेंगे तो उसी लड़के से करेंगे वरना अपनी जान दे देंगे। विशाल की बात सुनकर अकरम सन्न रह गया! उसने पूछा अदिति कहाँ है ? वो अपने रूम में होगी तू उसे समझा यार वरना मेरी समाज में क्या इज़्ज़त रह जाएगी। अकरम अदिति के पास जाता है अदिति अकरम को देख कर सलाम करती है, आप अमेरिका से कब आए अकरम चाचा ? बस बेटा आज ही आया और आते ही विशाल से मिलने चला आया पर यहाँ तो सब उल्टा पुल्टा है ये क्या सुन रहा हूँ बेटा क्या ये सच है ? हाँ चाचा ये सच है! पर बेटा क्यों? तुम्हारे घर खानदान में नाते रिश्तेदार में इतने अच्छे अच्छे लड़के हैं फिर ग़ैर बिरादरी में शादी क्यों कर रही हो ? लड़के! कौन से लड़के कैसे लड़के मम्मी के पास बैठो तो पापा के ख़ानदान की बुराई पापा के पास बैठो तो मम्मी की ख़ानदान की...

ये बुज़ुर्ग किसी अनमोल धरोहर से कम कम नही है इनका संरक्षण करें। बुज़ुर्गों के साथी बने

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बहुत सारे रिश्ते हैं पर हर रिश्ते से परे दोस्ती का रिश्ता है। दोस्ती का रिश्ता क्यों ज़रूरी है ये उन बुज़ुर्गों से पूछो जिनके बच्चे जवान होकर किनारे होगए हैं। वो किसके साथ अपने दिल की बात करें किससे कहें अकेले वक़्त गुज़रना बहुत मुश्किल होता है। जवान है तो कई सारे दोस्ती के रंग देखेंगे बहुत सारे साथी मिलेंगे पर जैसे जैसे उम्र गुज़रती जाती है किसी ऐसे हंसी ठिठोली करने वाले साथी की ज़रूरत बढ़ती जाती है जो बिना कहे उसका दर्द, उसकी बीमारी उसकी परेशानी उसके हालात हो समझ ले। किसी का कोई कॉलेज का साथी होता है कोई साथ मे काम करने वाला कोई दूर का कोई आस पड़ोस का। बुज़ुर्गों के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी आस पड़ोस के दोस्त होते हैं जिसके साथ वो वक़्त बिता सकें अपने दुख दर्द को साझा कर सकें बच्चे तो बुज़ुर्गों को बुढ़ा समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते है। उनकी हर बात सुई की तरह चुभने लगती है आज के नौजवान और बच्चे तो तूनकमिज़ाज होते हैं उनसे कुछ कहोगे तो वो उल्टा आप पर ही चिल्लाने लगेंगे।  इंसान अपनी बुज़ुर्गी में बिल्कुल बच्चे की तरह होजाता है अल्लाह ने क़ुरआन के सूरह यासीन में फ़रमाया "हम इंसान की उम्र को उसकी...

एक ऐसा ज़िला जहाँ हिन्दू मुस्लिम का अनोखा और बेमिसाल है भाईचारा

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नफ़रतें क़दम बढ़ा रही हर तिफ़लों पीरों जवां के साथ मोहब्बत की हवा बहाएंगे हम ऐसी कई शमा के ख़िलाफ़ नफ़रतें बिक़ जाती हैं मोहब्बत के ख़रीददार नही मिलते झूठ के आगे सच के बाज़ार नही दिखते। आज सारे देश में हिन्दू मुस्लिम के बीच एक ऐसी गहरी खाई बना दी है जिसे पाटना बहुत मुश्किल है। ना वो होली की गुझिया रही ना दीवाली की मिठाई ईद की सेंवई पर भी अब होने लगी लड़ाई। जिस तेज़ी से नफ़रत पैर फैला रही है लगता है सारी दुनिया को अपनी ज़द में ले लेगी। इन नफ़रतों से परे उत्तर प्रदेश में एक ऐसा ज़िला है जो हिन्दू मुस्लिम एकता की एक जीती जागती मिसाल है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं इल्म ओ अदब के शहर हर मज़हब ओ मिल्लत के मर्कज़ गंगा जमुनी तहज़ीब की धूरी शीराज़ ए हिन्द जौनपुर की जिसके बिना भाईचारे की मिसाल है अधूरी। एक ओर जहां राजनीति ने हिन्दू मुस्लिम के बीच इतनी दूरी बना दी है जिससे ना त्यौहारों की रौनक बची ना पकवानों की लज़्ज़त। पर ये जौनपुर के लिए अपवाद है,जौनपुर में आज भी हिन्दू मुस्लिम भाईचारा उसी तरह क़ायम है। इस्लाम की चौक के इतिहासिक चेहल्लुम का ताज़िया बनाने वाले महशर हुसैन और उनके पुत्र नुसरत अब्बास ने बताया कि ...

मशीनों पर सवारी एंटीबायोटिक से यारी, कहीं ये ना पड़ जाए हमे भारी

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नीम हक़ीम ख़तरे जां, ये कहावत तो आपने ज़रूर सुनी होगी। आज इस आधुनिक मशीनीकरण के दौर में ये कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होने लगी है। हर गली मोहल्ले में मुन्ना भाई जैसे डॉक्टरों की फ़ौज खड़ी है साथ ही उनके पीछे खड़ा है पैथोलॉजी जैसा मौत का साम्रज्य। अप्रशिक्षित और अशिक्षित पैथोलॉजी वालों ने तो कितनो को बिन बीमारी के ही बीमारी देकर मार डाला। माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक्निकल कम्पनी कर मालिक बिलगेट्स ने कहा कम्प्यूटर और तकनीक से कुछ भी संभव है, कम्प्यूटर ने इंसान को स्मार्ट बना दिया है। इसपर अली बाबा ग्रुप के मालिक़ जेक मा ने कहा कम्प्यूटर और तकनीक से चाहे जितनी तरक़्क़ी कर ली जाए पर *कम्प्यूटर कभी इंसान को नही बना सकता, हाँ इंसान ज़रूर कम्प्यूटर को बना सकता है नई नई तकनीक पैदा कर सकता है, कम्प्यूटर जितना भी स्मार्ट होजाए पर रहेगा इंसान से पीछे ही*। अब आते हैं हम असली मुद्दे पर भारत में 57.3% प्रतिशत फ़र्ज़ी डॉक्टर है जिनके पास किसी प्रकार की कोई डिग्री नही है उसमें भी 31.7% डॉक्टरों ने केवल हाई स्कूल तक ही शिक्षा हासिल की है ये WHO द्वारा भारत में किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट कह रही है। अब आप बताइय...

क़दीम, कसीर, हीन,मुद्दत,ज़माना क्या है। वो बातें जो हमे नही बताई गई पार्ट-2

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आज जो इस्लाम का चेहरा दुनिया को दिखाया जा रहा है इस्लाम बिल्कुल उसके उलट था पर आज के जाहिल मुसलमानों ने उस इस्लाम का हुलिया बिगाड़ दिया। इसी दिन के लिए रसूल ए ख़ुदा (सअ) ने फ़रमाया था मैं तुम्हारे दरम्यान दो ज़िलाक़द्र चीज़े छोड़े जा रहा हूँ अगर इससे जुड़े रहोगे तो कभी रुस्वा और ज़लील नही होंगे। एक क़ुरआन और दूसरी अहलेबैत अलैहिस्सलाम। पर अफ़सोस ना आज का मुसलमान क़ुरआन को समझ सका ना अहलेबैत को। जिस यूरोप में आज वैज्ञानिकों की भरमार है कभी आप ने सोचा है कि सत्तरहवी शताब्दी से पहले तक कोई वैज्ञानिक क्यों नही हुआ ? छठी शताब्दी से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक इस्लाम का गोल्डन पीरियड था उस वक़्त दानिशवरों की फौज खड़ी होगयी थी जिसमे फ़ादर ऑफ केमेस्ट्री जाबिर इब्ने हय्यान (जिसे यूरोप में जबर या जेब के नाम से जाना जाता है) अल किन्दी, फादर ऑफ मेडिसिन अबू अली सेना (अविसिन्ना) सर्जरी के मास्टर अल जवाहिरी, अलजेब्रा का ईजादकर्ता अल-ख़्वारिज़्मी, उमर ख़य्याम, फ़ादर ऑफ ऑप्टिक्स इब्ने अल हैथम (अलहज़ेन), इस्हाक़ बिन अली, जाफ़र मोहम्मद इब्ने मूसा, नसरुद्दीन तूसी, कुतुबुद्दीन अल शीराज़ी ने इंद्रधनुष बनने की सही वजह दुनिय...

क़ुरआन मज़हबी क़िताब नही छुपा हुआ ख़ज़ाना है। वो बातें जो नही बताई गयी

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आज इस्लाम की मुसलमान की क्या सूरत बना दी है इन कठ मुल्लो,ख़ातिबो और ज़ाकिरो ने।जिस क़ुरआन को वैश्विक, दुनिया वालों के लिए एक नज़ीर बना कर भेजा गया था उसे मज़हबी क़िताब तक समेत दिया। क़ुरआन के अस्सी प्रतिशत पहलू को छुपा कर बीस प्रतिशत उस पहलू को ज़माने के लिए पेश किया जिससे उनकी रोज़ी रोटी चल सके। इंसानी की रहनुमाई वाली क़ुरआन को मुर्दो की मग़फ़िरत की क़ुरआन बना दिया।  हदीस है इल्म तुम्हारी मीरास है उसे हासिल करो , अल्लाह क़ुरआन मे फरमाता है, इस क़िताब में दुनिया की हर ख़ुश्क ओ तर चीज़ों का ज़िक्र है। मौला अली ने नहजुल बलाग़ा में फ़रमाया: हिकमत की बात जहां कहीं हो, उसे हासिल करो क्योंकि हिकमत मुनाफ़िक़ के सीने में भी होती है, लेकिन जब तक उससे निकल कर मोमीन के सीने में पहुँच कर दूसरी हिकमतो के साथ बहल नही जाती तड़पती रहती है। हिकमत मोमीन की ही गुमशुदा चीज़ है उसे हासिल करो चाहे मुनाफ़िक़ से लेना पड़े। जो लोग अपनी दुनिया संवारने के लिए दीन से हाथ उठा लेते हैं, यो ख़ुदा उस दुनियावी फ़ायदे से कहीं ज़्यादा उनके लिए नुक़सान की सूरते पैदा कर देता है। बहुत से से पढ़े लिखे को दीन से बेख़बरी तबाह कर देती और जो इल...

ख़ुद का घर संभलता नही और ये टुकड़ो में बंटे मुसलमान दुनिया फ़तह करेंगे

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(Image source BBC हििंदी) मुसलमान बारिश की उस बूंद की तरह है जो रेत पर गिरने से सुख जाती है और मिट्टी पर गिरने से कीचड़ बन जाती है।  जहाँ मुसलमान ज़्यादा है वहां एक दूसरी की मदद को हाथ नही बढायेंगे पर इन्हें फ़िक़्र अफ़ग़ानिस्तान , सऊदी, तुर्की, ईरान पाकिस्तान के मुसलमानों की है। जो आपके सामने है उसके लिए आपने क्या किया ? कितने ग़रीब मुसलमानों के लिए आपने आवाज़ बुलंद की कितनो को रोज़गार और शिक्षा दिलाई,कितने ग़रीब परिवार का सहारा बने ? फिरकापरस्ती से फ़ुर्सत नही हसद बुग्ज़ ओ कीना भरा पड़ा है कहने को बस मुसलमान है पर अगर देखे तो ना हर मुसलमान एक दूसरे का दुश्मन बना पड़ा है।  इन्हें लगता है अगर ये सोशल मीडिया पर नही लिखेंगे तो इस्लाम ख़तरे में पड़ जाएगा इस्लाम और मुसलमान की अलम्बरदारी इनके हाथ में है अपनी अधकचरी जानकारी के साथ मुसलमानों की  ताक़त बनने की जगह उन्हें टुकड़ो में बांट दिया है। अल्लाह,रसूल,सहाबा,ख़लीफ़ा, इमाम,शिया सुन्नी,हनफ़ी, देवबंदी, वहाबी,सफायी, सूफी, अहले हदीस, बरेलवी, सैय्यद, शेख, पठान अंसारी, मिर्ज़ा, सिद्दीक़ी, अहमदी, इस्माईली,  खोजा बोहरा, ऐसा लगता है ये ज़ात ...

बे अमल ना मुक़म्मल मौलवी बांट देंगे किसी को भी जन्नत। क्योंकि ये है मौलवी की जन्नत

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एक बार एक मौलवी साहब सफ़र से वापस आएं , पता चला की घर में कुछ खाने को नही है सफ़र की थकन और कई दिनों से नहा नही पाने से पसीने से तरबतर मौलवी साहब को किसी ने बताया कि बगल में हाजी साहब के यहाँ लल्लनटॉप दावत चल रही है। मौलवी साहब एकदम चपूवा भूखे थे सोचा पहले शिकम सेर हो ले फिर नाहा धो कर ढेर हो ले। मौलवी साहब के बदन से बदबू बहुत ज़्यादा आरही थी। मौलवी साहब जैसे दावत में पहुँचे सब इस्तक़बाल में खड़े होगए पर जैसे ही मुसाफ़े के लिए आते नाक भौं सिकुड़ने लगते। मौलवी साहब को अंदाज़ा होगया की बदन दफ़्न करने लायक़ है बेहतर है जल्दी खा पी के यहाँ से चिराओं ले लिया जाए। मौलवी साहब ने हाजी साहब को बुलाया और फ़रमाया मेरे बदन से बहिश्त की खुशबू आती है पर इसे सिर्फ़ ईमान वाला मुत्तक़ी परहेज़गार मोमीन ही सूंघ सकता है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखता है,काफ़िर, मुशरिक, मुनाफ़िक़, मुनकिर को ये खुश्बू कभी नही सुंघाई देगी क्या आपको कुछ खुशबू महसूस होरही है ? हाजी साहब ने सोचा अगर कहेंगे कि खुशबू नही बदबू आरही है तो ईमान पर सवाल उठेगा, हाजी साहब ने कहा माशाअल्लाह, सुभानअल्लाह मैं सदके  जाऊं, क़ुर्बान होजाऊ...

इमाम हुसैन (अस) की शहादत पर महापुरुषों ने क्या कहा है

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दस मुहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला में यज़ीद इब्ने मुआविया एक ज़ालिम आतंकवादी द्वारा इमाम हुसैन इब्ने अली अलैहिस्सलाम को कर्बला के मैदान में तीन दिन का भूखा प्यासा इकहत्तर (71) साथियों के साथ बेरहमी से शहीद कर दिया गया था जिसमे छह महीने का छोटा बच्चा भी था। इस दिन को आशूरा कहा जाता है और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का ग़म मनाया जाता है।  महापुरुषों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लिए क्या कहा है आइये जानते हैं  इमाम हुसैन की शहादत को नहीं भूले लोग प्रधानमंत्री नरेंद मोदी:  इमाम हुसैन (स.अ.व.) ने अन्याय को स्वीकार करने के बजाय अपना बलिदान दिया. वह शांति और न्याय की अपनी इच्छा में अटूट थे.उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं. इमाम हुसैन के पवित्र संदेश को आपने अपने जीवन में उतारा है और दुनिया तक उनका पैगाम पहुंचाया है. इमाम हुसैन अमन और इंसाफ के लिए शहीद हो गए थे. उन्होंने अन्याय, अहंकार के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद की थी. उनकी ये सीख जितनी तब महत्वपूर्ण थी उससे अधिक आज की दुनिया के लिए ये अहम है. महात्मा गांधी: मैंने हुसैन से सीखा कि मज़लूमियत में...

मानसिक रोगी हो तो घर पर रहो ये कंगारू की तरह सड़क पर उछलती क्यों रहती हो। हादसा या साज़िश जाने आज

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लखनऊ वाला कैब ड्राइवर काण्ड आप लोगों को जो भी लगता हो पर मेरा नज़रिया इसको लेकर एक़वाफिना, बिसलेरी, किनले, और एक़वालीने कि तरह बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर है। मुझे ये एक्सीडेंट नही बल्कि एक सोची समझी साज़िश लगती है। आप देखिए प्रियदर्शिनी यादव किस तरह सड़क पर आती है उससे पहले एक गाड़ी खड़ी रहती है उसको पार करके ज़ेब्रा लाइन पर आती हैं वहाँ लाल सिंग्नल होता है गाड़ी से पाँच-सात क़दम पहले ही वो ज़ेब्रा लाइन पर रुक जाती है जब गाड़ी क़रीब आने को रहती है तभी फिर कैब ड्राइवर शहादत को निकाल कर पीटने लगती है पुलिस वाला  खड़ा देखता रहता है लड़की लड़को को कंगारु की तरह उछल उछल के कंटाप लगा रही है जैसा कि वीडियो में दिखाया गया है। मुझे ये हादसा कम साज़िश ज़्यादा लगती है वो इसलिए कि आगामी विधानसभा चुनाव होने है उत्तर प्रदेश में , कुछ सर्वे में दावा किया जा रहा है कि अगली सरकार सपा की बनने वाली है। अब आइये मेरे नज़रिये को 3D ग्लास लगा कर स्लो मोशन में देखते हैं। जैसा कि कहा जा रहा है कि आगामी विधानसभा में सपा की सरकार बनने के चांस है, अबे तैय फिर भी ना समझे बुड़बक, धत पगला, सपा सरकार बनने के चांस है मत-बल स...

जाने पूर्व में किस गलतफहमी से होता रहा है शिया सुन्नी विवाद मुहर्रम में और किस बात पर जारी हुई एडवाइजरी

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उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक डीजीपी सर द्वारा एक पत्र जारी किया गया है उस पत्र में मुहर्रम के मद्देनज़र पुलिस अधीक्षकों को दिशा निर्देश दिया गया है। उपयुक्त पत्र में मुहर्रम के संबंध में बहुत सारी बातें कही गयी है जिसमे मुहर्रम को अतिसंवेदनशील बताया गया है तथा ये भी कहा गया है इससे शिया सुन्नी विवाद उत्पन्न होसकता हैं। डीजीपी साहब का कहना है कि शिया समुदाय सुन्नी मुसलमानों के ख़लीफ़ाओं के ख़िलाफ़ तबर्रा (व्यक्तिगत लक्षणीय टिप्पणी) करते हैं।  तबर्रा के संबंध में कुछ बातें स्पष्ट करना चाहते हैं। पहली बात ये है कि इस्लाम में हज़रत मोहम्मद साहब के बाद जो उनके धार्मिक कार्यो को आगे बढ़ाए है तथा उनके दिशा निर्देशों का पालन किया वो ख़लीफ़ा कहलाएं। हज़रत मोहम्मद साहब की मृत्यु के बाद मुसलमानों के चार ख़लीफ़ा हुवे हज़रत उमर, हज़रत,अबू बक्र, हज़रत उस्मान और हज़रत अली। हज़रत अली मोहम्मद साहब के दामाद थे उनकी एकलौती बेटी शहज़ादी फ़ातिमा ज़हरा (स.अ) के पति थे इन्हें शिया समुदाय अपना पहला इमाम (नेतृत्वकर्ता/ रहनुमा) मानता है। हज़रत अली ने हज़रत मोहम्मद (स) के साथ बहुत सारी जंगे की है। हज़रत अली के ही कनिष्...

अफ़सोस की सोशल मीडिया के धुरंधर बिना बातों को समझे चेपने लगते हैं, एक एडवाजरी ही तो है

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सोशल मीडिया कॉलेज की रफ कॉपी है कुछ भी लिखते रहो क्या फ़र्क़ पड़ता है जाना रद्दी में ही है। अब हमारी क़ौम के लोगों को ही देख लो जिस बात को प्यार से समझाया जा सकता है उस बात के लिए तक़रार पैदा कर रहे हैं। इस्लाम धर्म में तर्क के साथ बात की गई है। क़ुरआन अगर पढ़ा है तो देखे किस तरह उसमे तर्क दिया गया है नहजुल बलाग़ा पढ़े किस तरह हर चीज़ को तर्क के साथ समझाया गया है। पर अफसोस ही हमारी क़ौम ने जज़्बात को अपनाया जा नमाज़ को नही । एक एडवाजरी आयी उसपर हो हल्ला मच गया कॉपी पेस्ट वालों ने बिना सोचे समझे चेपना शुरू कर दिया अबे पहले समझ तो लेते उसमे क्या लिखा है और उस बात का जवाब कैसे देना है। हर बात कहने का समझाने का अपना तरीक़ा होता है। पहली बात की आज तक आप ये नही समझा पाएं की मुहर्रम क्या है क्यों मनाया जाता है और इससे सामाजिक और आर्थिक क्या फ़ायदा है। दूसरी चीज़ हम शिया सुन्नी पर लड़ते रहे पर इसपर कभी ध्यान नही दिया इसका आगे अंजाम क्या होगा ना आपके लड़ने से क़ुरआन बदल सकता है ना इस्लाम बदल सकता है। जो बातें लोहे महफ़ूज़ में है उसे आप बदल नही सकते ना किसी के ईमान और आमाल को आप बदल सकते हैं। जो बातें है...

गधों की फैक्ट्री लगाने के लिए कोचिंग संस्थानों से सम्पर्क करें

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शिक्षा एक ऐसा शब्द है जिसको सुनते ही शिष्टाचार,आचरण, व्यवहार, कॉपी क़िताब मस्तिष्क में दौड़ने लगता है। शिक्षा तब तक कारगर नही है जब तक उसे किसी संस्था से मान्यता ना मिले इसी काग़ज़ी मान्यता प्राप्त करने के लिए हम लाखों करोड़ों ख़र्च कर देते हैं। रॉकेट साइंस, रोबोटिक साइंस पढ़ने की जगह हम रोबोटिक टीचरों के भरोसे हैं। माना कि मार्गदर्शक ज़रूरी है पर इसका मतलब ये नही हम अपनी अक़्ल ही ना लगाएं और सीधा कोचिंगों के भरोसे ही रह जाएं। आईआईटी और नीट की तैयारी करने वाले छात्र छात्राएं लाखों ख़र्च करती हैं उन्हें पढ़ाने वाली कोचिंग संस्थान करोड़ों ख़र्च करती हैं। कोचिंग पढ़ने के बाद आप अगर किसी कॉलेज में एडमिशन लेने जायेंगे अगर वैसा मार्गदर्शक आपको नही मिला तो क्या आप पढ़ना छोड़ देंगे ? नही ना कॉलेज में जाने पर आप अपनी अक़्ल काशत प्रतिशत उपयोग करेंगे पर उसी कॉलेज में आने के लिए लाखों करोड़ों ख़र्च करेंगे। अब आप बताइये आपकी वैल्यू कॉलेज की पढ़ाई से होगी या उन कोचिंग संस्थानों से जिसके लिए आप लाखों ख़र्च कर रहे हैं। आपको मान्यता कोचिंग नही कॉलेज ही देगा वैश्विक परिदृश्य आपका कॉलेज ही आपके लिए बनायेगा आप कोच...

ना किसी दवा से ना हथियार से इंसान ख़ुद ही मर जाएगा एहसास ए कमतरी के वार से

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इस दुनिया में हर किसी को सब कुछ हासिल नही होता वो उसे हासिल करने की कोशिश करता रहता है। हर किसी के अंदर कुछ ना कुछ कमी ज़रूर है और उसी कमी को कहते हैं "लोग क्या कहेंगे" ये दुनिया का सबसे बड़ा मर्ज़ है सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग जो इंसान को जीते जी मार देता है,उसके लिए ना कोई हथियार चाहिए ना कोई दवा ना कोई जदीद तरीक़ा बस एहसास ए कमतरी को अपने दिल में बैठा ले नज़र ए हक़ीर होजाएं फिर देखिए कैसे आपकी ज़िन्दगी तबाह और बर्बाद होती है। ये दुनिया हैं यहां हर किसी के अंदर कुछ ना कुछ कमी ज़रूर है किसी के पास दौलत है तो सेहत नही सेहत है तो दौलत नही दोनों है तो वक़्त नही वक़्त है तो दौलत नही वक़्त है पर इल्म नही इल्म है पर सेहत नही सेहत ओ दौलत है पर सुकून नही। सेहत वाला दौलत वाले से परेशान हैं कि उसके पास इतनी दौलत है दौलत वाला उसकी सेहत से परेशान है कि ये लम्बा ताडंगा और सेहतमंद कैसे हैं। सेहतमंद इल्म वाले से परेशान है कि उसके पास इल्म नही इल्म वाला अदब ओ तहज़ीब से महरूम है अदब ओ तहज़ीब वाला महफ़िल से महरूम है महफ़िल वाला अमल से महरूम है।  आपको अंग्रेज़ी नही आती आप बाहर जाते हैं चार लोगों...

संयुक्त परिवार में शादी करने के क्या फ़ायदे हैं इससे जानकर चौंक जायेंगे आप

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शीतल (काल्पनिक नाम) की पढ़ाई पूरी होते ही घर वालों ने रिश्ता ढूंढना शुरू कर दिया।शीतल नाज़ों की पाली लड़की थी घर के काम से मतलब कभी नही था ना किसी बात का हुनर था कुछ था तो लम्बी ज़बान और खूबसूरती ए आसमान। शीतल के परिवार वाले चाहते थे कोई छोटा मोटा परिवार हो जहां शीतल की शादी होजाए ज़िन्दगी का गुज़र बसर अच्छे से हो लड़का पढ़ा लिखा और अच्छा कमाता हो। शीतल के दिल में कुछ और ही था लड़का डेशिंग हो हैंडसम हो पैसे वाला हो और परिवार छोटा हो, शीतल की खूबसूरती को देख कर रिश्तों की लाइन लग गयी उसमे से आकाश (काल्पनिक नाम) का रिश्ता उसे पसन्द आया करोड़पति था हैंडसम था पर संयुक्त परिवार (Joint Family) से था आकाश को भी शीतल पहली ही नज़र में भा गयी। आकाश तीन भाई और 3 बहनों में सबसे बड़ा था साथ ही तीन चाचा चाची उनके बच्चे दादा दादी भी थे भला बड़े बेटे की पसन्द को कैसे इनकार किया जा सकता था आकाश और शीतल की सगाई होगयी दोनों आपस में बात करने लगे। शीतल और आकाश में प्यार होगया दिल से नही शीतल को आकाश की दौलत से और आकाश को शीतल की खूबसूरती से इतने दिनों तक बात करके आकाश को शीतल की मंशा का अंदाज़ा भी नही हुआ कि...

फेसबुक पर कैसे ब्लॉक् होती है आईडी जाने इस पोस्ट में

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प्रवीण बहुत सक्रीय (एक्टिव) रहता था सोशल मीडिया पर उसके लेख को काफ़ी सराहना भी मिलती थी पर एक दिन अचानक प्रवीण की किसी पोस्ट की वजह से फेसबुक पर उसकी आईडी ब्लॉक कर दी गयी प्रवीण समझ नही पाया ऐसा क्यों हुआ है उसके साथ । केस : 2 : आकांक्षा (काल्पनिक नाम)अपने परिवार से छुप कर अश्लिल वीडियो देखा करती थी और अपने दोस्तों से व्हाट्सएप पर चैटिंग करती थी एक दिन आकांक्षा के पिता ने उसका मोबाइल मांगा और उसका फेसबुक खोला जैसे ही उन्होंने देखा उनके होश उड़ गए आकांक्षा के फेसबुक न्यूज़ फीड में केवल गंदी गंदी फ़ोटो, ग्रुप, वीडियो, और ऐसे ही दोस्तो का सजेशन आने लगा। आकांक्षा ने पिता ने उसका मोबाइल छीन लिया और उसपर मोबाइल इस्तेमाल करने की पाबंदी लगा दी। उसे ये समझ में नही आया जो फेसबुक तो वो ना इस तरह का कुछ सर्च करे ना किसी तरह की ऐसी बातें हो और ना ही ऐसा कोई वीडियो देखा हो फिर उसकी न्यूज़ फीड में इस तरह के अश्लील पोस्ट क्यों दिखाई दे रहे हैं । _________________________ ये समस्या सिर्फ़ प्रवीण या आकांक्षा के साथ नही होरही ये समस्या हर किसी के साथ होती है कभी आपने सोचा है आप जो गूगल पर सर्च करते...